कासगंज। शुक्रवार को आंधी-तूफान ने देखते ही देखते दर्जनभर गांव में तबाही का तांडव कर दिया। आग लगने के कारण लाखों की संपत्ति स्वाहा हो गई। सहावर के नगला राधे में अगिभनकांड के दौरान घर में सो रहे मासूम नीतेश की मौत हो गई। लोगों का घरेलू सामान, गल्ला, नगदी, जेवर, आग की भेंट चढ़ गया। प्रभावित ग्रामीणों के पास न तो तन ढकने के लिए कपड़े हैं और न खाना खाने के लिए दाना बचा। ऐसी विषम परिस्थितियों में ग्रामीण के पास सिर्फ आंसू बचे हैं।
कासगंज क्षेत्र में सबसे बड़ी आग की घटना नगला मोती में हुई। शुक्रवार को करीब सांय सात बजे हीरा सिंह के छप्पर में चूल्हे से उठी चिंगारी से आग लग गई। तूफानी हवाओं के चलते हीरा सिंह के घर से लगी आग ने गांव में तांडव मचाना शुरू कर दिया। देखते-देखते पांच दर्जन घर इस आग की चपेट में आ गए। तेज हवाओं के बीच आग क ी लपटें कोहराम मचाती रहीं। ग्रामीणों आग की लपटों के आगे बेबस दिखे। वे घर का कुछ भी सामान नहीं बचा सके।
नगला मोती की आग बुझ नहीं पाई कि इससे पहले ही कासगंज के भैंसोरा बुजुर्ग में आग ने कहर बरपाना शुरू कर दिया। यहां सबसे पहले ग्रामीण अनवरी बेगम के मकान से उठी चिंगारी से आग की लपटें शुरू हो गई। लगभग आधा दर्जन मकानाें को आग ने अपनी चपेट में ले लिया। यहां दमकल की सहायता नहीं पहुंच पाई। ग्रामीण स्वयं ही नलकूप की सहायता से आग बुझाते नजर आए। यहां बुर्जी बुटेरे भी आग की भेंट चढ़ गए।
सहावर क्षेत्र के नगला राधे में दर्जन भर मकान आग की चपेट में आ गए। इसके अलावा दो परचून की दुकान भी आग की भेंट चढ़ गईं। घर के अंदर सो रहा जगदीश का पुत्र नीतेश आग की लपटों में घिर गया। बताया गया कि कुछ देर पहले ही मासूम की बहन उसे घर में सुलाकर आई थी, लेकिन घर में आग लगने के बाद परिवारीजन आग बुझाने में जुट गए। जब उन्हें ध्यान आया तब तक देर हो चुकी थी। कुंवरपुर गांव में आधा दर्जन से अधिक मकान आग की भेंट चढ़ गए। ग्रामीण सतीश के मकान से आग की लपटें शुरू हुई और फिर सात मकान इसकी जद में आ गए। कुंवरपुर में भी दमकल की सहायता नहीं पहुंच पाई। ग्रामीणों ने स्वयं ही कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। सिढ़पुरा के पिथनपुर में, सहावर के बोंदर, अमरपुर, तारापुर, नगला बाले, क्यामपुर बहेड़िया, नगला भूतल, सहित अन्य गांव में दर्जनों मकान आग की भेंट चढ़ गए।