कासगंज। सरकार द्वारा लागू किए गए जनसूचना अधिकार अधिनियम का अफसरों को डर नहीं है। मांगी जाने वाली सूचना को देने से अफसर कतराते नजर आते है। ऐसा ही एक मामले में राज्य सूचना आयोग ने विद्युत विभाग के अधिशाषी अभियंता को तलब किया है। आयोग ने अधिशाषी अभियंता को चार दिसंबर को उपस्थित होने के निर्देश दिए है।
वडडू नगर निवासी मौहम्मद जावेद ने 7 अगस्त 2011 को विद्युत विभाग के अधिशाषी अभियंता से दस बिंदुओं पर जन सूचना अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी। उन्होंने पूछा था कि विभाग का प्रथम अपीली अधिकारी कौन है, जनपद में तीन वर्ष से अधिक समय से कितने कर्मचारी तैनात है उनका तबादला क्यों नहीं किया गया। राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत वर्ष 2008 से 2011 तक कितने ग्रामों का विद्युतीकरण किया गया इस पर कुल कितना खर्च हुआ। टोरेंट कंपनी गलत बिलिंग कर रही है जिससे उपभोक्ता परेशान हैं, यदि इस मामले में उपभोक्ता अदालत में जाना जाएं तो क्या आपके खिलाफ जाएगा या कंपनी के खिलाफ। ट्रंासफार्मर फुंकने या मरम्मत करने, ताराें के बदलने का कार्य ठेकेदारी से होते हैं, ठेकेदारों को क्लीयरेंस कौन देता है और पैसा कहां से दिया जाता है। कासगंज में कितने प्राइवेट कर्मचारी विद्युत विभाग में है एवं किसकी देखरेख में कार्य कर रहे हैं, अधिशाषी अभियंता का सीयूजी नंबर सहित दस बिन्दुओं पर जानकारी मांगी थी, लेकिन सवा साल में यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। जानकारी उपलब्ध न कराने पर राज्य सूचना आयोग में मामला दायर किया गया। राज्य सूचना आयोग ने अधिशाषी अभियंता को उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी गई हे कि स्पष्टीकरण न देने पर नियामानुसार आदेश पारित कर दिया जाएगा।