निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत कुपोषित बच्चों के परिवार वाले मुफ्त में भी गाय लेने को तैयार नहीं है। जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या 8633 है लेकिन अब तक मात्र 6 परिवारों ने ही योजना के तहत आश्रय स्थल की गाय लेने में दिलचस्पी दिखाई है। ऐसी स्थिति में जहां सरकार की महत्वाकांक्षी योजना दम तोड़ रही है वहीं कुपोषित बच्चे भी पोषित नहीं हो पा रहे।
शासन ने कुपोषित बच्चों को पोषित करने के लिए गाय का दूध उपलब्ध कराने के लिए करीब चार माह पहले निराश्रित गोवंशों को कुपोषित बच्चों वाले परिवारों को देने की योजना शुरू की। योजना के तहत निराश्रित गोवंश स्थल से जिन पशुओं को लिया जाएगा उनको बेचा या खुला नहीं छोड़ा जा सकता।
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योजना के तहत कुपोषित बच्चों के परिवार आश्रय स्थल से इन गायों को ले सकते हैं। जिला में 8633 कुपोषित बच्चे हैं। इनमें से 1830 बच्चे अति कुपोषित श्रेणी के हैं। बावजूद इसके कुपोषित बच्चों के परिवार के लोग आगे नहीं आ रहे। इससे योजना के क्रियान्वयन से जुड़े विभाग के अधिकारी भी परेशान है। अधिकारी ऐसे परिवार के लोगों को गोपालन के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं, लेकिन सार्थक परिणा सामने नहीं आ पा रहे।