लूट के शिकार सर्राफ को धोखाधड़ी, कूटरचना और फर्जी एफआईआर कराने की धारा में जेल भेजने के पूर्व एसएसपी यशस्वी यादव के गुडवर्क की डीजीपी ने जांच शुरू करा दी है। घटना के एक साल तीन महीने बाद इस मामले में डीजीपी के आदेश से महकमे में खलबली मच गई है। जांच एसपी ग्रामीण को सौंपी गई है।
सर्राफ श्रीराम रस्तोगी पनकी के गंगागंज भाग-4 मुहल्ले में रहते हैं। घर से कुछ दूरी पर प्रीती ज्वैलर्स नाम से दुकान है। 18 फरवरी की रात सर्राफ ने 100 नंबर पर सूचना दी कि बाइक सवार तीन बदमाश घर के दरवाजे पर उनसे झोला लूट ले गए। झोले में 22 किलो चांदी और 85 हजार रुपये थे। लाइसेंसी बंदूक से फायर करने पर बदमाश भागे। बड़ी बेटी दीपा और छोटी प्रीती की बदमाशों से गुत्थमगुत्था भी हुई। बाद में 22 फरवरी को पुलिस लाइन में प्रेस कान्फ्रेंस करके तत्कालीन एसएसपी यशस्वी यादव ने सर्राफ श्रीराम रस्तोगी को ही दोषी बताया। कहा कि गिरवी रखे गए जेवरों को हड़पने के लिए सर्राफ ने लूट का नाटक रचा। एसएसपी ने झोले की बरामदगी ऊपरी मंजिल के कमरे से दिखाई। दूसरी ओर सर्राफ की पत्नी प्रभा रस्तोगी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पति को फर्जी मामले में जेल भेजा है। जबरदस्ती कबूलनामा कराया गया। उनकी पायल उतारकर पुलिस ने एफआईआर में लिखाई गई चांदी की तौल पूरी की। जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद सर्राफ ने डीजीपी दफ्तर जाकर शिकायत की। डीजीपी के आदेश पर अब इस प्रकरण की जांच शुरू हुई है।
कई ट्रांसफर तो कुछ जिले में तैनात
गुडवर्क करने वाले कई पुलिस अफसर जिले से बाहर ट्रांसफर हो गए तो कुछ अभी जिले में ही तैनात हैं। पूर्व एसएसपी यशस्वी यादव, एसपी ग्रामीण डॉ. अनिल मिश्र और तत्कालीन एसओ राजकरन शर्मा का तबादला हो चुका है। सीओ जितेंद्र श्रीवास्तव यहीं कोतवाली में सीओ और तत्कालीन क्राइम ब्रांच प्रभारी संजय मिश्र इन दिनों पुलिस आफिस में तैनात हैं। इनके अलावा गुडवर्क की फर्द में एसआई राम सिंह, कांस्टेबल शिवनरेश, महेश पांडेय, राजेंद्र सिंह और जितेंद्र यादव के नाम हैं।
कोट
मुझे डीजीपी आफिस से जांच का आदेश मिला है। वादी पक्ष को नोटिस देकर अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया है। परिवार और गुडवर्क करने वाली पुलिस से भी पूछताछ की जाएगी।
-सुरेंद्र नाथ तिवारी, एसपी ग्रामीण