यहां का ‘गंगाजल अब आचमन लायक भी नहीं है’ अगर ये गंगा जल हम भगवान शिव पर चढ़ाएंगे तो वो नाराज होकर रूठ जाएंगे। कुछ ऐसी सोच के साथ भोले भंडारी के भक्त जलाभिषेक का बड़ा ही अनोखा तरीका अपना रहे हैं। कानपुर के इस प्राचीन शिव मंदिर में भगवान शंकर का जलाभिषेक विशेष तरीके से करने की रीति शुरू हो चुकी है। यहां सैकड़ों की तादाद में आने वाले भक्त मिनरल वाटर शिवलिंग पर चढ़ा रहे हैं।
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नागेश्वर मंदिर
कानपुर के इस प्राचीन शिव मंदिर का नाम नागेश्वर धाम है जिसे लोग कछुआ तालाब के नाम से भी जानते हैं। लोगो की माने तो सावन के सोमवार में जो भी दर्शन को यहां आता है वो कभी खाली हाथ नहीं जाता हैं आज इस मंदिर में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सैकड़ों भक्तों ने गंगा जल के बजाय मिनरल वाटर से भगवन भोले का जलाभिषेक किया।
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नागेश्वर धाम
यह दृशय जिसनें भी देखा तो वह चकित हो गया। मंदिर के महंत और श्रद्धालूओ का कहना था कि पिछले 28 सालो से मां गंगा बदहाली के आंसू बहाने को मजबूर है, वही अब तक 900 करोड़ रुपये गंगा सफाई अभियान में बह गए। आलम ये है कि गंगा का जल इतना प्रदूषित हो चुका हैं कि आचमन के लायक भी नहीं है। इसलिए हम लोग मिनरल वाटर से भोलेनाथ का जलाभिषेक कर रहे हैं।
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नागेश्वर धाम
भक्तों की मानेें तो गंगा का जल पूरी तरह से आचमन के लायक नही ,अगर गंगा का ये प्रदुषित जल चढ़ायेंगे तो भोले के नाराज होने का डर हमको सताता है। क्योंंकि ये जल आचमन योग्य नहीं है तो हम प्रभु पर कैसे चढ़ा दें। हम नहीं चाहते हमारी पूजा में कोई त्रुटि हो।
सावन के अवसर पर देश में जहां एक ओर भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की खासी भीड़ देखने को मिल रही है, लोग अलग-अलग तरीके से शंकर जी की पूजा अर्चना कर रहे है, वही कानपुर के पनकी में स्थित प्राचीन नागेश्व धाम में एक अनोखी तरह की पूजा देखने को मिल रही है। सोमवार को इस शिव मंदिर में सैकड़ों की तादाद में महिलाएं-पुरुष और बच्चो ने भगवान शिव का जलाभिषेक मिनरल वाटर की बोतलों से किया।