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World Mosquito Day: नौ तरह के मच्छर चूस रहे कनपुरियों का खून, तीन प्रजातियां सबसे ज्यादा कर रही हैं बीमार

Sun, 20 Aug 2023 10:33 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: जिला मलेरिया अधिकारी एके सिंह ने बताया कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों का लगातार सर्वे किया जाता है। कीट विशेषज्ञ जगह-जगह सैंपलिंग करते हैं। उन्होंने बताया कि क्यूलैक्स मच्छर गंदे पानी में होता है। जहां नालियां बजबजाती हैं और पानी नहीं निकल पाता, वहां यह मच्छर पनपने लगता है।
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विश्व मच्छर दिवस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर में विश्व मच्छर दिवस रविवार को है। शहर में तीन प्रजातियों के नौ मच्छर लोगों का खून चूस रहे हैं। घरों के अंदर और बाहर इन प्रजातियों का राज है। मच्छरों की प्रजातियों में एडीज, एनाफिलीज और क्यूलैक्स हैं। इनमें सबसे बड़ा खानदान क्यूलैक्स मच्छरों का है।

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इस प्रजाति के सबसे अधिक चार प्रकार के मच्छर हैं। साथ ही एनाफिलीज प्रजाति के तीन और एडीज प्रजाति के दो मच्छर लोगों का खून पी रहे हैं। जिला मलेरिया विभाग के सर्वे अभियान में मच्छरों की इन प्रजातियों की पहचान हुई है। क्यूलैक्स इकलौता ग्रुप है जिसके मच्छर पूरे शहर में फैले हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस ग्रुप के मच्छरों का दबदबा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैसे तो मच्छरों की तीन हजार प्रजातियां होती हैं, लेकिन इनमें ज्यादातर शाकाहारी हैं। मानव रक्त की शौकीन ये तीन प्रजातियां शहर में हैं। ये खून पीने के साथ लोगों को गंभीर रोग दे रही हैं।

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जगह-जगह सैंपलिंग करते हैं विशेषज्ञ
जिला मलेरिया अधिकारी एके सिंह ने बताया कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों का लगातार सर्वे किया जाता है। कीट विशेषज्ञ जगह-जगह सैंपलिंग करते हैं। उन्होंने बताया कि क्यूलैक्स मच्छर गंदे पानी में होता है। जहां नालियां बजबजाती हैं और पानी नहीं निकल पाता, वहां यह मच्छर पनपने लगता है।

जमा पानी में प्रजातियां करती हैं ब्रीडिंग
यहां झाडियां, जमीन के गड्ढों में पानी भरा रहता है और हैंडपंपों का इस्तेमाल अधिक होता है। वहां एनाफिलीज पनप जाते हैं। ये दोनों मच्छर के घर के बाहर होते हैं। घरों में एसी, कूलर, फ्रिज और पानी भरे कंटेनर होने की वजह एडीज की प्रजातियां ब्रीडिंग करने लगती हैं।

क्यूलैक्स
  • गंदे पानी में ब्रीडिंग करता है। 
  • चार प्रजाति- क्यूलैक्स पिपियंस, क्विनक्वेफासियाटस, विश्नुई, ट्राइटिनियोरिंकस। 
  • रोग- फाइलेरिया, जापानी इंसेफ्लाइटिस, हाइड्रोसील, स्तन में सूजन का रोग, सूखी खांसी, सफेद पेशाब आना (काइलोरिया) आदि रोग।
  • प्रभावित क्षेत्र- पूरा शहर और ग्रामीण इलाके। 

एडीज
  • साफ पानी में होता है। खासतौर पर कंटेनर, कूलर, फटे टायर आदि में ब्रीडिंग करता है
  • दो प्रजाति- एजिप्टाई, एल्बोपिक्टस। 
  • रोग- चिकुनगुनिया, डेंगू, जीका और इंसेफ्लाइटिस आदि रोग होते हैं।
  • प्रभावित क्षेत्र: रामनगर, सिविललाइंस, हरजिंदरनगर, जनरलगंज, जाजमऊ, पटेलनगर, गुजैनी, यशोदानगर आदि मोहल्ले।
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एनाफिलीज
  • जमीन के गड्ढों में भरे साफ पानी में ब्रीडिंग करता है। 
  • तीन प्रजाति- स्टीफेंसाई, प्यूलीसिफेस, गैंबी। 
  • रोग- मलेरिया वाइवैक्स और फेल्सीपेरम आदि रोग करता है।
  • प्रभावित क्षेत्र-  झकरकटी के आसपास की बस्तियां, चौक सराफा, सिविल लाइंस, गुप्तार घाट, भगवतदास घाट, गीतानगर (वार्ड 52) परेड आदि मोहल्ले
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