वह सारी रात कान में ईयर फोन लगाकर सुनता है और नाचता है। इस बीच अगर कोई उसे टोक दे या सोने के लिए कहे तो वह तोड़फोड़ करने लगता है। दवा देने पर खाता नहीं है। इस पर उन्हें सलाह दी गई कि खाने में दवा दें जिससे वह खा ले। जब स्थिति बेहतर हो तो उसकी काउंसलिंग कराएं।
साल भर के अंदर ओपीडी में 45 अभिभावकों ने आकर यह समस्या बताई है। इसके अलावा निजी मनोरोग विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों के यहां लोग यह समस्या लेकर आ रहे हैं। हर्षनगर के जीतेंद्र ने बताया कि उनका बेटा हाईस्कूल में पढ़ रहा है। सोशल साइट पर क्लास के बहाने जाता है। इसके बाद पता नहीं रात भर क्या देखता है? उसकी खुराक कम हो गई है। इसके साथ ही आंख की समस्या हो रही है। डॉ. गणेश शंकर ने बताया कि लॉक डाउन के बाद इस तरह की समस्या बढ़ी है। इससे बच्चों के मिजाज में भी बदलाव आया है।
ये करें
- किशोरों से सहानुभूति पूर्ण व्यवहार करें।
- उनकी दिलचस्पी वाले मुद्दों पर बात करें।
- फोन का इस्तेमाल एकदम से बंद करने के बजाय अवधि घटाने को कहें।
- फोन का इस्तेमाल न करने पर उन्हें पुरस्कृत करें।
- किताबें पढ़ने के लिए उनमें दिलचस्पी पैदा करें।