श्रमिक स्पेशल ट्रेन से बुधवार को कानपुर सेंट्रल पहुंचे श्रमिकों के सामने घर जाने की समस्या खड़ी हो गई। किसी तरह कानपुर तक तो आ गए लेकिन अब गृह जनपद जाने को बसें नहीं मिल रहीं हैं। काउंटर वाले कहते हैं चालक से जाकर पूछो वह ले जाएगा। चालक व परिचालकों से जिले की बस का पता नहीं चल रहा है।
मुंबई में फैक्ट्री में काम करने वाले संजय कुमार अपने परिवार और 18 साथियों के साथ ट्रेन से बुधवार को कानपुर सेंट्रल पहुंच गए, अब गाजीपुर अपने गृह जनपद जाने के लिए बस नहीं मिल रही है। दोपहर के 12 बजे कानपुर सेंट्रल आ गए थे, शाम 4 बजे तक बस का पता नहीं चला। ऐसे ही लगभग दो दर्जन यात्री बस के लिए परेशान घूम रहे हैं।
औरंगाबाद के एक स्कूल में केमिस्ट्री टीचर था। लॉकडाउन में तनख्वाह मिलना बंद हो गई। कुछ दिन पहले स्कूल प्रबंधक ने कह दिया कि नौकरी पर नहीं रखेंगे। इसलिए घर वापस आना पड़ा।
- अनिल पाल, निवासी जौनपुर
मुंबई में स्टूडियो चलाता था। काम बंद होने पर सामान बेचकर किराया अदा कर पत्नी ममता और दो बेटियों सपना, पूजा के साथ लौट आया हूं। अब मुंबई नहीं जाऊंगा।
- राजाराम मौर्य, निवासी फतेहपुर
मुंबई के एक शूटिंग स्टूडियो में लेबर था। पैसा खत्म होने पर घर लौट आया। अब यहां कोई काम शुरू करूंगा।
- फारुक खान, निवासी प्रयागराज
अंधेरी के एक सैलून में काम करता था। पत्नी रुबीना और 4 साल की बेटी आलिया के साथ कई दिन भूखे सोना पड़ा। अपने घर के पास ही सैलून खोलूंगा।
- गुड्डू हुसैन, निवासी उन्नाव