बांदा जिले में सफाई कर्मी, प्रधानों व सचिवों की तिकड़ी ने स्वच्छ भारत मिशन को फ्लाप कर दिया है। छह सालों से ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात साढ़े सात सौ सफाई कर्मी गांव में झाड़ू लगाने के बजाए सचिव व प्रधानों से साठगांठ कर मुफ्त वेतन ले रहे हैं। पंचायत राज विभाग और विकास से जुड़े अधिकारी शौचालयों तक ही मिशन को सीमित किए हैं।
इस समय जिले में 750 से ज्यादा सफाई कर्मी हर माह 15 से 18 हजार रुपये प्रति कर्मी मानदेय लेकर मौज कर रहे हैं। नरैनी ब्लाक में 134, तिंदवारी में 108, महुआ में 138, बड़ोखर खुर्द में 105, जसपुरा में 48, कमासिन में 67, बिसंडा में 60 और बबेरू में 88 सफाई कर्मी नियुक्त हैं। ये कर्मी प्रधानों की साठगांठ से हर माह फर्जी हाजिरी भरकर वेतन का भुगतान करा रहे हैं।
सीडीओ से लेकर डीपीआरओ तक ने भारत स्वच्छता अभियान को शौचालयों तक ही सीमित कर दिया है। गांव-गांव गंदगी का अंबार है। उधर, डीपीआरओ आनंद प्रकाश का कहना है कि ऐसे लगभग एक दर्जन लापरवाह सफाई कर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। आगे भी इन पर कड़ी नजर रखी जा रही है।