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Kanpur News: समूहों से जुड़ेंगी महिलाएं, आत्मनिर्भर बनेंगे परिवार

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कानपुर। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ने जिले में पांच से 20 अगस्त तक परिवार संतृप्तीकरण महाअभियान शुरू किया है। इसके तहत राशन कार्डधारक प्रत्येक परिवार की कम से कम एक महिला सदस्य को स्वयं सहायता समूह से जोड़ा जा रहा है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से 2,40,500 महिलाओं को समूहों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
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इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर समूह सखी, बैंक सखी और पंचायत सचिव कैंप लगा रहे हैं। इसका उद्देश्य महिलाओं को बचत, बैंकिंग, ऋण और स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाना और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करना है। समूह से जुड़ने के बाद निर्धारित प्रक्रिया और पात्रता पूरी करने पर महिलाओं को चरणबद्ध आर्थिक सहायता मिलेगी। समूह का खाता खुलने के बाद 2500 रुपये प्रारंभिक निधि, करीब तीन माह बाद 30 हजार रुपये रिवॉल्विंग फंड और छह माह बाद 1.50 लाख रुपये तक की सहायता ऋण के रूप में दिए जाने का प्रावधान है। इसके अलावा बैंक से समूह को 1.50 लाख से 10 लाख रुपये तक कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) मिल सकती है।
इस धनराशि से महिलाएं छोटे कारोबार, पशुपालन, सिलाई, खाद्य प्रसंस्करण, उत्पादन और सेवा आधारित गतिविधियां शुरू कर सकती हैं। अभियान में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन समेत अन्य योजनाओं के पात्र लाभार्थी परिवारों की महिलाओं को भी प्राथमिकता से समूहों से जोड़ा जा रहा है। खंड विकास अधिकारियों के माध्यम से ग्राम पंचायत सचिवों और पंचायत सहायकों को प्रभावी ढंग से अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
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बिल्हौर में सबसे ज्यादा, ककवन में सबसे कम महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य
विकासखंडवार लक्ष्य में बिल्हौर सबसे आगे है। यहां 31,030 महिलाओं को समूहों से जोड़ने का लक्ष्य है। सरसौल में 28,746, कल्याणपुर में 28,588, घाटमपुर में 29,689 और भीतरगांव में 27,347 महिलाओं को जोड़ा जाएगा। बिधनू में 25,025, शिवराजपुर में 20,240, पतारा में 20,088, चौबेपुर में 21,253 और ककवन में सबसे कम 8,494 महिलाओं को समूहों से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

वर्जन

अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना है। समूहों से महिलाओं को वित्तीय संसाधन और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। - आलोक कुमार सिंह, परियोजना निदेशक डीआरडीए
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