मामले का संज्ञान लेकर महिला आयोग की सदस्य पूनम कपूर और रंजना शुक्ला मंगलवार को आशा ज्योति केंद्र पहुंचीं, वहां के कर्मचारियों व सुरक्षा कर्मियों से पूछताछ की। पूनम कपूर ने बताया कि केंद्र में कोर्ट के आदेश पर पॉक्सो और घरेलू हिंसा की पीड़िताओं को ही रखा जाता है। मां-बेटी को नियम दरकिनार कर यहां रखा गया था।
कर्मचारी बोली...मैंने मना किया था पर पुलिस वाले नहीं माने
रविवार रात सवा दो बजे जब पुलिस मां बेटी को लेकर आशा ज्योति केंद्र पहुंची थी तो वहां पर एक महिला कर्मचारी मौजूद थी। दो महिला सिपाही भी थीं। कर्मचारी ने महिला आयोग की टीम को बताया कि जब पुलिसकर्मी दोनों को लेकर पहुंचे थे तो उन्होंने उनको रखने से मना कर दिया था। मगर पुलिस वाले नहीं माने थे। बोले थे कुछ ही घंटे रखना है, सुबह दोबारा पूछताछ के लिए उनको ले जाएंगे। पुलिस के दबाव में आकर कर्मचारी विरोध नहीं कर सकी थी।
डीएम को भेजी रिपोर्ट, गिर सकती है पुलिसकर्मियों पर गाज
पूनम कपूर ने बताया कि मामले की जांच रिपोर्ट आयोग की अध्यक्ष को भेज दी गई है। जांच में नवाबगंज पुलिस की लापरवाही व गलती उजागर हुई है। आयोग की तरफ से एक पत्र डीएम को भेजकर मामले में कार्रवाई करने को कहा गया है। ऐसे में नवाबगंज के जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो सकती है। पुलिस कमिश्नर को भी इस संबंध में पत्र भेजा गया है।
दोपहर दो बजे के बाद नहीं होती एंट्री
पूनम कपूर के मुताबिक कोर्ट के आदेश के बगैर घरेलू हिंसा व पॉक्सो पीड़िताओं को भी वहां नहीं रख सकते। जिनको रखा जाता है, उनकी एंट्री दोपहर दो बजे तक ही की जाती है। इस तरह अवैध रूप से आधी रात के बाद किसी को वहां रखना पूरी तरह नियम के खिलाफ है।