सरवनखेड़ा। गजनेर थाना क्षेत्र के पतरा गांव के बाहर ऊसर में रखी झोपड़ी में मंगलवार दोपहर 12:40 के करीब आग लग गई। इससे झोपड़ी में अंदर सो रही महिला की जिंदा जलने से मौत हो गई जबकि पति गंभीर रूप से झुलस गया। पुलिस ने पति को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है। वहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।
पतरा निवासी अजय करीब चार साल से गांव से 500 मीटर की दूरी पर पतरा-मोहाना मार्ग किनारे स्थित पटवा ऊसर में झोपड़ी बनाकर पत्नी पारुल (27) व बेटी अनन्या के साथ रहते थे। उनके पिता बरगदी व परिजन गांव स्थित घर में रहते हैं। मंगलवार दोपहर को अजय व उसकी पत्नी पारुल झोपड़ी में सो रहे थे जबकि बेटी अनन्या अपने दादा के पास गई थी। दोपहर पौने एक बजे के करीब मोहना से घर लौट रहे पतरा निवासी अरुण ने अजय की झोपड़ी में आग लगी देख शोर मचाने के साथ घटना की जानकारी दमकल व पुलिस को दी। जब तक ग्रामीण मौके पर पहुंचे तब तक आग ने पूरी झोपड़ी को अपनी जद में ले लिया।
इधर झोपड़ी की दीवार पारुल के ऊपर गिर जाने से वह मलबे में दब गई। उसको बचाने के प्रयास में अजय भी गंभीर रूप से झुलस गया। सफलता न मिलने पर उसने झोपड़ी से बाहर निकल कर ग्रामीणों को पत्नी के झोपड़ी में फंसे होने की जानकारी दी। इस पर ग्रामीणों ने डंडों की मदद से पारुल को झोपड़ी से बाहर निकाला लेकिन पूरी तरह से जल जाने की वजह से उसकी जान चली गई। पुलिस ने घायल अजय को सीएचसी गजनेर में भर्ती करवाया। वहां डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज में भी डॉक्टर ने उसकी हालत नाजुक देखते हुए हैलट कानपुर नगर रेफर कर दिया।
इधर घटना की जानकारी पर सीएफओ प्रतीक श्रीवास्त, अग्निशमन अधिकारी कपिल चाहर दो दमकल वाहनों के साथ मौके पर पहुंचे लेकिन तब तक आग से झोपड़ी भी जलकर राख हो गई। सूचना पर पहुंची एसडीएम नीलिमा यादव, तहसीलदार पवन कुमार, सीओ भोगनीपुर राजीव सिरोही, अकबरपुर थानाध्यक्ष हरमीत सिंह, गजनेर थानाध्यक्ष सूर्यप्रताप सिंह ने घटना स्थल पर छानबीन कर आसपास के लोगों से जानकारी जुटाई। इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। सीओ राजीव सिरोही ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। मामले में जांच व परिजन की तहरीर के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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प्रयास के बाद भी पत्नी को न बचा पाने से अजय बदहवास
- पत्नी को बचाने में गंभीर रूप से झुलसने के बाद झोपड़ी से निकला अजय लगाता रहा मदद की गुहार
संवाद न्यूज एजेंसी
सरवनखेड़ा। झोपड़ी में आग लगने के बाद दीवार गिर जाने से मलबे में दबी पत्नी को बचाने के प्रयास में अजय स्वयं झुलस गया। अकेले सफलता न मिलने पर उसने झोपड़ी से बाहर निकलकर लोगों से मदद की गुहार लगाई लेकिन आग के तांडव से पत्नी की आंखों के सामने तड़प-तड़प कर मौत हो गई। पत्नी का शव बाहर निकलने के बाद से अजय बदहवास हो गया।
झोपड़ी में आग लगने से झुलसे अजय ने पुलिस को बताया कि मंगलवार सुबह वह पत्नी के साथ मूंग की फसल की कटाई करने के लिए गया था। दोपहर 12 बजे के करीब पारुल के साथ वापस झोपड़ी में लौटा था। थकान की वजह से वह दोनों सो गए थे। झोपड़ी के बाहर लोगों के चीखने पर उनकी नींद टूटी। उसने पत्नी को जगाया, झोपड़ी के बाहर भागना चाहा लेकिन दीवार ढ़ह जाने से पत्नी मलबे में दब गई। उसने मलबा हटाकर पत्नी को निकालने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली तो उसने झोपड़ी के बाहर निकलकर लोगों से मदद मांगी। लोगों ने भी पत्नी को बचाने के भरपूर प्रयास किए लेकिन उसकी आंखों के सामने ही पत्नी तड़प-तड़प कर जिंदा जल गई। झोपड़ी में आग लगने से पास में बंधा एक मवेशी भी झुलस गया। पारुल की मौत पर ससुर बरगदी, सास सोमवती, जेठ संदीप कुमार, रवि कुमार, देवर सत्यभान बिलखते रहे।
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घर छोटा व परिवार बड़ा होने से झोपड़ी में रहने लगा था बेटा
पतरा निवासी बरगदी ने बताया कि उन्हें करीब 10 साल पहले सरकारी आवास का लाभ मिला था। इस पर उन्होंने गांव में पक्के घर का निर्माण करवाया था। सात साल पहले तीसरे नंबर के बेटे अजय की शादी हो गई थी। परिवार बढ़ने से छोटे घर में रहने में परेशानी होती थी। इस पर चार साल पहले बेटा अजय, बहू पारुल व पौत्री अनन्या के साथ गांव के बाहर झोपड़ी बनाकर रहने लगा था। उनके पास कुल दो बीघा जमीन है। बेटों के हिस्से में महज 10-10 विश्वा जमीन आने पर अजय साझेदारी पर जमीन लेकर खेती किसानी के साथ नवीपुर स्थित एक फैक्टरी में मजदूरी करता है।
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सोलर पैनल की मदद से चार्ज करते थे मोबाइल
बरगदी ने बताया कि बेटे ने जिस जगह पर झोपड़ी बनाई है। वहां बिजली का कनेक्शन नहीं है। बेटा-बहू झोपड़ी में प्रकाश व्यवस्था करने व मोबाइल चार्ज करने के लिए एक बैटरी व सोलर पैलन लगाए हुए थे।
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चूल्हे की चिंगारी से आग लगने की आशंका
मंगलवार दोपहर 12:47 बजे पतारी में झोपड़ी में आग लगने की सूचना मिली थी। इसके 20 मिनट बाद दो दमकल वाहन मौके पर पहुंचे थे लेकिन तब तक झोपड़ी पूरी तरह से जल चुकी थी। झोपड़ी में बिजली का कनेक्शन नहीं था। घटना को देखते हुए प्रथम दृष्टया चूल्हे की चिंगारी से आग लगने की आशंका है। - प्रतीक श्रीवास्तव, सीएफओ