कानपुर। बिल्हौर ब्लाॅक के बीडीओ बलराम सिंह ने निलंबित वीडीओ नरेंद्र वर्मा की बहाली के बाद उन्हें क्लस्टर आवंटित कर दिया।बीडीओ ने जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह से इसकी अनुमति भी नहीं ली जबकि उनके आदेश के बिना क्लस्टर आवंटित नहीं हो सकता। हाईकोर्ट के आदेश पर वीडीओ को परियोजना निदेशक ने बहाल किया था। अब दो क्लस्टर के बीच तीन सचिवों की तैनाती है। अब सचिव तय नहीं कर पा रहे कि विकास कार्यों में किसके हस्ताक्षर होंगे। ऐसे में पंचायतों के सभी कार्य ठप हो गए हैं।
ग्राम विकास अधिकारी नरेंद्र वर्मा को अप्रैल माह में सीडीओ दीक्षा जैन ने सीएम आवास के नाम पर पैसे मांगने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इस पर वीडीओ हाईकोर्ट चले गए थे। नरेंद्र को आवंटित क्लस्टर मदारारायगुमान और पूरा अलग-अलग ग्राम पंचायत सचिवों को सौंप दिए गए थे। मदारारायगुमान में सलोनी कुशवाहा और पूरा क्लस्टर में सत्यम की तैनाती जिलाधिकारी के निर्देश पर डीपीआरओ मनोज कुमार ने की थी।
जुलाई महीने में हाईकोर्ट ने निलंबित सचिव को बहाल करने का आदेश जारी किया गया था। परियोजना निदेशक आलोक कुमार ने वीडीओ नरेंद्र वर्मा को बहाल कर दिया। इधर बीडीओ बिल्हौर ने वीडीओ को दोनों क्लस्टर आवंटित कर दिए जबकि दोनों क्लस्टर में ग्राम पंचायत अधिकारियों की तैनाती है।
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बीडीओ ने मनमानी तरीके से क्लस्टर आवंटन का आदेश जारी किया है। बीडीओ को क्लस्टर आवंटन करने का कोई अधिकार नहीं है। नियमानुसार जिलाधिकारी की अनुमति के बाद क्लस्टर आवंटित होता है। -मनोज कुमार, डीपीआरओ