वातावरण में बढ़ रहे प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग की वजह से विंटर मानसून (ठंड में होने वाली बारिश) का चक्र बिगड़ गया है। इसे क्लाइमेट चेंज (जलवायु परिवर्तन) भी कहते हैं। मानसून चक्र गड़बड़ाने की वजह से ही पिछले कई सालों से ठंड के मौसम में बारिश नहीं हो रही है। इसके चलते स्वाभाविक ठंड का क्रम भी आगे पीछे हो गया है।
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सीएसए, कानपुर के मौसम विभाग के अनुसार दिसंबर और जनवरी के बीच के दिनों को विंटर मानसून कहा जाता है। इस मानसून में सामान्य तौर पर 50 मिमी बारिश होती है पर कई सालों से ऐसा हो नहीं रहा है। इस बार भी बारिश की उम्मीद है नहीं।
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मौसम विभाग के अनुसार पूरे साल चार मानसून अलग-अलग समय में सक्रिय रहते हैं। सभी मानसूनी दिनों में बारिश और मौसम कैसा होगा, इसका एक चक्र निर्धारित है। पिछले कुछ वर्षों से यह चक्र तेजी से बिगड़ा है। इसे लेकर मौसम विज्ञानियों में भी चिंता है।
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मौसम विज्ञानियों की तरफ से जारी रिपोर्ट में इस बार कहा गया है कि जलवायु चक्र की स्थिति में अभी सुधार संभव नहीं है। इसकी वजह यह है कि प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। चंद्रशेखर आजाद कृषि विवि में स्थापित मौसम विभाग के निदेशक नौशाद खान का कहना है कि प्रदूषण रोकने के लिए सस्ता और सुलभ कार्य है पेड़ों की संख्या बढ़ाई जाए, जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाए, रासायनिक उर्वरक की खपत कम की जाए। उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते क्रम को कम करने के लिए विश्व भर में काम चल रहा है।
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पूरे वर्ष के चार सक्रिय मानसून
दिसंबर-जनवरी के बीच : विंटर मानसून
मार्च से मई के बीच : समर मानसून
जून से सितंबर के बीच : साउथ-वेस्ट मानसून
अक्तूबर से नवंबर के बीच : पोस्ट मानसून