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कानपुर में व्हाइट फंगस की दस्तक: दो संक्रमित मिले, जांच में पुष्टि के बाद हैलट में भर्ती

Tue, 25 May 2021 01:42 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

ब्लैक फंगस वायरस के बाद कानपुर में सोमवार को दो व्हाइट फंगस (कैंडिडा) के मरीज मिलने से स्वास्थ्य विभाग सकते में आ गया है। दोनों मरीजों को कानपुर हैलट में भर्ती कराया गया है।
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व्हाइट फंगस - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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ब्लैक के बाद कानपुर में व्हाइट फंगस (कैंडिडा) ने भी दस्तक दे दी है। सोमवार को आई पैथॉलॉजिकल जांच रिपोर्ट में दो मरीजों में इसकी पुष्टि हुई। दोनों को हैलट के ब्लैक फंगस सेंटर में भर्ती किया गया है।
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डॉक्टरों ने बताया कि व्हाइट फंगस के मरीजों में भी म्यूकर माइकोसिस (ब्लैक फंगस) जैसे लक्षण उभरे थे। इसी आधार पर उनकी डायग्नोसिस तैयार की गई थी।

दोनों मरीज पोस्ट कोविड हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि व्हाइट फंगस ब्लैक से कम घातक है। लेकिन, ये दोनों फंगस शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होने के बाद बढ़ते हैं। व्हाइट फंगस को एंटी फंगल दवाओं और क्रीम से ठीक किया जा सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक, कोरोना संक्रमित मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता कम होने और स्टेरॉयड के इस्तेमाल से दोनों फंगस का संक्रमण हो रहा है। 

कैंसर, गठिया, मधुमेह मरीजों को भी हो सकता
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर आरती लालचंदानी ने बताया कि व्हाइट फंगस बहुत सामान्य है। कैंसर, गठिया आदि की दवा खाने वाले और मधुमेह के मरीजों को भी यह जल्दी हो जाता है। इसका संक्रमण गाल, गले के अंदर, जीभ और आंतों में भी हो सकता है।
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एंटीबायोटिक दवा खाने से आंतों के अच्छे बैक्टीरिया भी खत्म हो जाते हैं, उससे ही यह फंगस पनपता है। बताया कि गंदगी, नमी वाले स्थान पर रहने से भी इसका संक्रमण जल्दी होता है। महिला रोगियों में यह संक्रमण अधिक मिलता है, लेकिन दवा से ठीक हो जाता है।
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