मौलाना मतीनुल हक ओसामा को कार्यवाहक शहरकाजी घोषित किए जाने के पहले ही दूसरे दावेदार हाफिज अब्दुल कुद्दूस की पैरवी शासन में हो चुकी थी। शायद यही वजह थी कि 28 जनवरी को मर्चेंट चेंबर हॉल में आनन फानन में कार्यक्रम आयोजित किया गया और मतीनुल हक ओसामा को कार्यवाहक शहरकाजी घोषित कर दिया गया।
दरअसल, सरकार की ओर से इस पद पर मनोनयन करने का अधिकार राज्यपाल को होता है। मौजूदा शहरकाजी मुफ्ती मंजूर भी 1979 में गवर्नर की ओर से नियुक्त हुए थे। जल्दबाजी में कराए गए कार्यक्रम के बाद विवाद इसलिए भी और बढ़ गया कि दावेदार हाफिज अब्दुल कुद्दूस सऊदी अरब में थे।
28 जनवरी को ऐलान किया गया लेकिन पत्र देकर बताया गया कि मौलाना ओसामा को एक जनवरी को ही कार्यवाहक शहरकाजी बनाया गया है। कार्यक्रम में एडीएम सिटी आशुतोष अग्निहोत्री मौजूद थे। देवबंदी विचारधारा के एक बड़े आलिम की बात मानें तो यह जल्दबाजी शासन में हुई हाफिज कुद्दूस की पैरवी की वजह से हुई।
सऊदी से लौटे हाफिज कुद्दूस
मौलाना अब्दुल कुद्दूस सऊदी अरब से लौट आए हैं। मंगलवार को वे कुली बाजार में उलेमा के साथ मीटिंग करेंगे और अपनी रणनीति का खुलासा बुधवार को मीडिया के सामने करेंगे।
मौलाना ओसामा के समर्थक जाजमऊ लारी कंपाउंड की मस्जिद फारूक आजम के इमाम मौलाना लुकमान मजाहिरी और मदरसा इनायतुल इस्लाम के शिक्षक मौलाना शरफे आलम शाकिबी ने कहा कि सऊदी अरब की पवित्र जगह हरम शरीफ में बैठकर झगड़े और फसाद के लिए उकसाना दुखद है। कुली बाजार मुख्यालय (हाफिज कुद्दूस का मदरसा) से इस तरह का विवाद फैलाया जा रहा है।
सरकारी ऐलान एक्ट से होगा
शहरकाजी को अपना नायब चुनने का अधिकार काजी एक्ट-1880 (12) के तहत है। जबकि शहरकाजी को तय करना राज्यपाल का अधिकार है। अब इस विवाद की जानकारी सरकारी इंटेलीजेंस ने शासन को दे दी है। इसलिए शहरकाजी पद पर सरकारी मुहर राज्यपाल के यहां से लगेगी। मुस्लिम मामलों के जानकार डॉ. इशरत सिद्दीकी ने बताया कि काजी एक्ट यूपी में 15 अक्तूबर 1970 की नोटिफिकेशन से प्रभावी है।