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क्या बैन, क्या नहीं, कोई नहीं जानता

Sun, 24 Jan 2016 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
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दादानगर कोपेइस्टेट में पॉलीथिन निर्माताओं को पॉलीथिन पाबंदी से संबंधित जानकारी देने आए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी ही यह नहीं बता सके कि मार्केट में किस तरह की पॉलीथिन बिकेगी, किस तरह की नहीं।
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किस तरह के प्लास्टिक उत्पाद पर पाबंदी है? किस पर नहीं? इस सवाल पर भी वे बगले झांकने लगे। इस पर उद्यमियों ने नाराजगी जताई और बैठक बीच में ही खत्म कर दी। उद्यमियों ने कहा कि वे डीएम से टाइम लेकर स्पष्ट करवाएंगे कि किस तरह के प्लास्टिक उत्पाद पर प्रतिबंध है। अभी कुछ स्पष्ट न होने से ऊहापोह की स्थिति है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी टीयू खान शनिवार को यूपी प्लास्टिक मैन्यूफैक्चरर्स वेलफेयर एसोसिएशन से जुड़े उद्यमियों को पॉलीथिन पाबंदी की जानकारी देेने आए थे। उनसे पूछा गया कि क्या प्लास्टिक के गिलास, दोना, पत्तल पर भी पाबंदी है तो उन्होंने इसकी जानकारी होने से इनकार किया।
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बताया कि अभी सिर्फ हर तरह की पॉलीथिन पर पाबंदी है। एसोसिएशन के चेयरमैन विजय कपूर ने कहा कि कुछ तरह के कैरीबैग को पाबंदी से मुक्त रखा गया है क्या, यह स्पष्ट नहीं है कि क्या मुक्त है क्या नहीं? इस पर भी वे कुछ जवाब नहीं दे सके।

एसोसिएशन के अध्यक्ष हरीश इसरानी, इखलाक मिर्जा आदि ने कहा कि कुछ भी स्पष्ट न होने से अजीब स्थिति बनी हुई है। कारोबारियों का करोड़ों का माल फंसा है। थोक-फुटकर सभी दुकानदार, हजारों श्रमिकों-कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर संकट है लेकिन अफसरों को कोई फिक्र ही नहीं।

इनको करनी है रोकथाम
टीयू खान ने बताया कि एसडीएम, नगर निगम, निदेशक पर्यावरण, नगर निगम, छावनी परिषद, विपणन एवं आपूर्ति अधिकारी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, श्रम विभाग के अधिकारियों को पॉलीथिन पाबंदी लागू करवाने की जिम्मेदारी है। इन विभागों के प्रतिनिधियों की तीन टीमें बना दी गई हैं।

12 किलो पॉलीथीन जब्त, 27 चालान
पॉलीथीन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत शनिवार को नगर निगम ने नौबस्ता हमीरपुर रोड और लालबंगला में कार्रवाई की। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पंकज श्रीवास्तव के नेतृत्व में जोनल स्वास्थ्य अधिकारी आरएस गंगवान ने दोनों स्थानों में पॉलीथीनों में खाद्य सामग्री बेच रहे 27 दुकानदारों के चालान किए गए। 12 किलो पॉलीथीन भी जब्त की गई।

फलने लगा कागज के लिफाफों का कुटीर उद्योग
पॉलीथिन पर पाबंदी लगते ही कागज के लिफाफे बनाने का कुटीर उद्योग अब फलने लगा है। डिमांड अचानक चार गुना तक बढ़ गई है। ईदगाह स्थित न्यू कालोनी में लिफाफा बनाने वाले मोहम्मद रईस बताते हैं कि उनके यहां साधारण लिफाफों का आर्डर बढ़ा है। वे मांग पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं।

इसके अलावा उनके यहां अलग-अलग तरह के लिफाफे और गत्ते के बैग बनाने का काम शुरू किया है। इसी तरह छोटे मियां का हाता निवासी लिफाफा कारीगर शाहिद मियां बताते हैं कि यहां घर-घर लिफाफा बनाने का काम होता है। पिछले एक सप्ताह से काम बढ़ा है। जिनके यहां से रोजाना पांच सौ लिफाफे बिकते थे वे अब एक हजार से 1500 तक बेच रहे हैं। रद्दी भी महंगी हो गई है। 10 से 12 रुपये किलो बिकने वाली रद्दी 14 से 16 रुपये किलो मिल रही है।  
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