झींझक। नगरपालिका क्षेत्र के लगरथा मार्ग किनारे आईएचएसडीपी के तहत बनाई गई कॉलोनी जरूरतमंदों को आवंटित नहीं हो सकीं। करीब नौ साल से लोगों को कॉलोनी आवंटन का इंतजार है। इधर देख रेेख के अभाव में आवासों का प्लास्टर टूटने लगा है और रंग रोगन खराब हो गया है। परिसर में खरपतवार व कंटीली झाड़ियां उग आई हैं।
आईएचएसडीपी (एकीकृत आवास एवं स्लम विकास कार्यक्रम) के तहत वर्ष 2009 में डूडा द्वारा करीब 10 करोड़ की लागत से 492 आवास, एक लिवलीहुड सेंटर, एक कम्युनिटी सेंटर, एक मार्केट और एक नलकूप का निर्माण शुरू कराया गया था। वर्ष 2016 में निर्माण कार्य पूरा भी हो गया था, लेकिन तब से अब तक काॅलोनी का जरूरतमंदों को वितरण नहीं हो सका है। लंबे समय से खाली पड़े आवास खराब होने लगे हैं। घरों के अंदर बाहर का प्लास्टर गिर रहा है। रंग-रोगन भी खराब हो गया है। कई जगहों पर मरम्मत की स्थिति बन गई है। नगर के मानचंद्र और अवधेश ने बताया कि गरीबों के लिए यह कॉलोनी बनाई गई मगर आवंटन नहीं हो सका। घर मिलने की आस अब खत्म होती नजर आ रही है।
देखरेख न होने से करोड़ों की लागत से बनी कॉलोनी खंडहर में तब्दील हो रही है। नगरपालिका झींझक के ईओ वीरेंद्र राव ने बताया कि कॉलोनी आवंटन के लिए 250 आवेदन डूडा कार्यालय भेजे गए हैं। तिथि मिलते ही इन आवासों का वितरण पात्र लाभार्थियों को करा दिया जाएगा।