कानपुर। नशीला कफ सिरप बेचने के आरोपी विनोद अग्रवाल को 15 साल पहले तक कोई नहीं जानता था। कुछ समय पहले उसने अपने बेटे शिवम अग्रवाल की शादी में करोड़ो रुपये खर्च किए और बिरहाना रोड स्थित करोड़ों रुपये का मकान भी ले लिया जिसके बाद वह चर्चा में आ गया।
थोक दवा व्यापारियों के अनुसार विनोद अग्रवाल का दवा बेचने का पैतृक काम है। विनोद अग्रवाल के पिता भी यही काम करते थे लेकिन वह इसमें बेहद ईमानदार और मिलनसार भी थे। उनका बाकी व्यापारियों के साथ उठना बैठना भी था। वह चार भाई थे और चारों मिलकर काम करते थे। विनोद और उसका भाई भी अपने पिता के साथ दवा का काम करने लगे। कुछ समय बाद पिता ने किसी कारण से विनोद को अलग कर दिया। विनोद ने कंप्यूटर का काम शुरू किया। 15 साल पहले कंप्यूटर का काम नहीं चला और इधर उसके भाई की भी मौत हो गई तो विनोद ने अपने पिता का बिजनेस संभाला। कुछ समय बाद पिता की भी मौत हो गई और विनोद ही पूरा कारोबार देखने लगा।
विनोद के पिता ड्रग लाइसेंस के तहत ही दवाएं बेचते थे लेकिन विनोद को जल्दी तरक्की की लालसा थी। विनोद ने ड्रग लाइसेंस के साथ नारकोटिक्स का लाइसेंस भी ले लिया। सूत्रों के अनुसार तब से ही इसके पास पैसे की बढ़त होने लगी और बाजार में चर्चा भी दबी जुबान में होने लगी। व्यापारियों के अनुसार विनोद अग्रवाल ने करोड़ों रुपये की कमाई की है।