गिरफ्तारी के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा जिस तरह से मध्यप्रदेश पुलिस की वाहवाही में लगे हुए हैं उससे तो ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वे इनामी राशि का हकदार पुलिस टीम को ही मान रहे हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने गिरफ्तारी पर कहा, 'मैं एमपी पुलिस को विकास दुबे की गिरफ्तारी के लिए बधाई देता हूं। मैं लगातार यूपी के अधिकारियों के संपर्क में हूं और यूपी के सीएम आदित्यनाथ से भी बात की है। आगे की जांच के लिए, उसे यूपी पुलिस को सौंप दिया जाएगा। दोनों राज्यों की पुलिस समन्वय में काम करेंगी।'
वहीं मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दुबे की गिरफ्तारी पर कहा कि यह पुलिस की एक बड़ी कामयाबी है। विकास दुबे एक क्रूर हत्यारा है। मध्यप्रदेश पुलिस अलर्ट पर थी। उसे उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार किया गया है। हमने उत्तर प्रदेश पुलिस को सूचित कर दिया है।
दोनों नेताओं की बात से तो ऐसा ही लग रहा है इनामी राशि मध्यप्रदेश पुलिस को भी दी जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो मंदिर परिसर का सवाल करना भी वाजिब होगा। हालांकि इसमें पुलिस का पक्ष भी अपने आप में मजबूत है कि अगर पुलिस चौकन्नी नहीं रहती तो मंदिर परिसर द्वारा दी गई सूचना के बावजूद विकास फरीदाबाद की तरह वहां से भी भाग सकता था।
चर्चा यह भी है कि विकास दुबे ने जानबूझ कर सुनियोजित तरीके से महाकाल मंदिर में अपनी गिरफ्तारी दी है, ताकि वह पुलिस एनकाउंटर से बच जाए। उसने अपने असली नाम से ही परिसर में प्रवेश करने के लिए पर्ची बनवाई।
इसके बाद भगवान के दर्शन किए और अंदर जाकर खुद ही चिल्ला-चिल्ला कर बोलने लगा कि, "मैं विकास दुबे हूं... कानपुर वाला!" इसपर सुरक्षाकर्मियों ने उसे पहचान लिया और पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद गिरफ्तारी हुई।
हालांकि पुलिस इस संबंध में उससे पूछताछ कर रही है। अगर यह साबित हो गया कि वाकई उसने इस तरीके से आत्मसमर्पण किया है, तब भी यह सवाल अनुत्तरित है कि इनामि राशि किसे मिलेगी?
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि करीब एक सप्ताह तक पूरे पुलिस महकमे को छकाने वाले अपराधी की गिरफ्तारी का श्रेय किसे जाता है और उसके नाम पर घोषित इनामी राशि किसे मिलती है!