कानपुर। अपराध रोकने और अपराधियों को पकड़ने के लिए यूपी पुलिस अब वीडियो सर्विलांस इक्विपमेंट का सहारा लेगी। पहले चरण के दौरान कानपुर, लखनऊ में इक्विपमेंट लगाए जाएंगे। इस काम में आईआईटी कानपुर मदद करेगा। इसी महीने आईआईटी और यूपी पुलिस के बीच समझौता भी होगा। इस पर सहमति बन गई है। आईआईटी की तरफ से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के सीनियर प्रो. डॉ. मणींद्र अग्रवाल को प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर बनाया गया है। प्रो. मणींद्र को एडवांस कंप्यूटिंग का एक्सपर्ट माना जाता है। उनके कंप्यूटर सिक्योरिटी फीचर को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है। अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है।
यूपी पुलिस और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी लखनऊ ने वीडियो सर्विलांस इक्विपमेंट को प्रभावी बनाने की रणनीति बनाई है। इसके माध्यम से अपराध की जो भी रिकार्डिंग होगी, उसकी साफ-सुथरी तस्वीर सामने लाने की कोशिश की जाएगी। प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने बताया कि आटोमैटिक कंप्यूटर की मदद से धुंधली रिकार्डिंग भी साफ की जा सकती है। रात या फिर घने कोहरे के वीडियो फुटेज को साफ किया जा सकता है। इसके लिए वीडियो सर्विलांस इक्विपमेंट को आटोमैटिक कंप्यूटर से जोड़ा जाएगा। अभी तक ऐसा नहीं हो पा रहा है। टेक्निकल सपोर्ट के लिए आईआईटी में प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी। इसके लिए आईआईटी प्रशासन ने जमीन देने का भरोसा दिलाया है। एमओयू इसी महीने होगा। इसके लिए यूपी पुलिस के एडीजी टेक्निकल और निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना के बीच मीटिंग हो चुकी है। प्रयोगशाला का मुख्य काम फोरेंसिक एक्सपर्ट को तकनीकी रूप से मजबूत बनाना रहेगा। इस संबंध में डीआईजी नीलाब्जा चौधरी का कहना है कि आईआईटी पुलिस और फोरेंसिक साइंस के एक्सपर्ट को टेक्निकल ट्रेनिंग भी देगा। फोरेंसिक का दफ्तर कानपुर में भी है, इसकी यूनिट बढ़ाई जा सकती है। ट्रेनिंग के लिए सर्विलांस सेल, पुलिस और फोरेंसिक साइंस की टीम तैयार की जा रही है।