अचानक पिता बयान से मुकर गया था
पिता का आरोप था कि पुलिस ने उनकी नाबालिग बेटी को भी थाने बुलाया। इससे वह तनाव में आकर बीमार पड़ गई, जिसका इलाज हैलट में चल रहा है। गुरुवार को प्रकरण की जांच करने एडीसीपी साउथ अंकिता शर्मा अस्पताल पहुंचीं थी, जिसके बाद अचानक पिता पुलिस की कार्रवाई पर संतोष जताते हुए बयान से मुकर गया था। पुलिस ने सबकुछ संभालने का प्रयास किया हो, लेकिन नाबालिग को थाने बुलाना सही नहीं था।
भाई बोला, किसी कागज में हस्ताक्षर कराने के लिए पुलिस लगा रही चक्कर
हैलट अस्पताल में बहन का इलाज करा रहे किशोरी के भाई ने अमर उजाला से की बातचीत के दौरान बताया कि आरोपी गांव में खुलेआम घूम रहे हैं। पुलिस फोन करके उल्टा उन्हें ही परेशान कर रही है। बताया शुक्रवार को दो पुलिस वालों ने किसी कागज पर उनके हस्ताक्षर करवाने के लिए तीन बार अस्पताल के चक्कर लगाए। भाई का आरोप है कि पुलिस उस कागज में उनके हस्ताक्षर करवाकर प्रकरण को हल्के में निपटाना चाहती है।
किशोर न्याय अधिनियम में यह साफ है कि किसी भी किशोर से पूछताछ करने के लिए उसे थाने में नहीं बुलाया जाएगा। उसके घर जाकर पूछताछ की जाएगी। पूछताछ करने वाला पुलिस की वर्दी में नहीं सादे कपड़े में जाएगा। किशोर के परिजन या मोहल्ले के किसी संभ्रांत नागरिक की मौजूदगी में मित्रतापूर्ण माहौल (चाइल्ड फ्रैंडली एटमासफियर) में पूछताछ करेंगे। -शिवाकांत दीक्षित, अधिवक्ता-फौजदारी
सदमे में है पीड़िता, सिर हिलाकर हां-न में दे रही जवाब
साढ़ थाने के अंदर अभद्रता का शिकार हुई नाबालिग छात्रा अभी भी सदमे में है। वह हैलट के बाल रोग विभाग में भर्ती है।कुछ भी बोल नहीं पा रही है। बोलने की कोशिश करती है, लेकिन आवाज नहीं निकलती। सिर हिलाकर हां और न में जवाब दे रही है। तुम्हारे साथ गलत हुआ है... इस सवाल के जवाब उसने हां में सिर हिलाकर दिया।
पीड़िता से हुई बातचीत के कुछ अंश
- तुम्हारे साथ किसने गलत किया... बोलने की कोशिश की पर मुंह से आवाज नहीं निकली।
- क्या तुम पर घरवाले किसी तरह का दबाव बना रहे थे : न में सिर हिलाया।
- क्या पुलिस ने कुछ गलत किया : हां में सिर हिलाया।
- क्या आरोपी तुम्हारे पीछे पड़ा था : हां में सिर हिलाया।
- क्या तुम्हें उससे बात करना अच्छा लगता था : न में सिर हिलाया।
बच्ची की हालत में कुछ सुधार है। इसलिए देखरेख को लेकर पीआईसीयू में शिफ्ट किया है। शारीरिक तौर पर तो कुछ ठीक हुई है, लेकिन मानसिक स्थिति अभी ठीक नहीं है। डिप्रेशन में है। इसलिए बोल भी नहीं पा रही है। -डॉ. एके आर्या, विभागाध्यक्ष, बाल रोग विभाग