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यह है हाल: लापरवाही की जंग से कंडम हुए करोड़ों के वाहन, कानपुर के 52 थानों में सड़ रहे 4931 वाहन, ये है नियम

Tue, 22 Apr 2025 12:57 PM IST
हिमांशु अवस्थी वाचस्पति पांडेय, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: नियमानुसार लावारिस वाहन को जब्त किए जाने के छह माह बाद नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। वाहन बरामद होने पर पुलिस पहले उसे धारा 102 के तहत पुलिस रिकॉर्ड में लेती है। फिर न्यायालय को इसकी जानकारी दी जाती है।
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थाने में खड़े जर्जर वाहन - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर कमिश्नरी में तैनात थानेदारों की लापरवाही सरकारी खजाने पर भारी पड़ रही है। समय से नीलाम न किए जाने की वजह से मालखानों में जब्त खड़े हजारों वाहन कंडम हो रहे हैं। इस वजह से लाखों की कीमत के वाहन महज चंद हजार रुपये में नीलाम हो रहे हैं। यह जब है जब कमिश्नरी के आला अधिकारी नियमों का हवाला देकर लगातार ऑपरेशन क्लीन के तहत थानों के परिसर में जंग खा रहे वाहनों को तत्काल बेचने के लिए जोर दे रहे हैं।

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कमिश्नरी के 52 थानों में जब्त किए गए 7365 वाहन खड़े हैं। इनमें 1824 वाहन माल मुकदमाती, 610 वाहन लावारिस व थानों में खड़े 4931 वाहन जब्तशुदा थे। नीलामी की प्रक्रिया जब शुरू हुई तो इन वाहनों की अनुमानित कीमत करीब सात करोड़ रुपये आंकी गई थी। दो माह पहले पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार के निर्देश पर थाना प्रभारियों ने मालखाना इंचार्ज और ज्यूडिशरी से तालमेल बनाकर नीलामी की प्रक्रिया शुरू की।  इस दौरान 7365 वाहनों में से 2434 को नीलाम कराया गया।

थाने में खड़े जर्जर वाहन - फोटो : amar ujala
4931 वाहन नहीं हो सके हैं नीलाम
अनुमान के अनुसार इन वाहनों के सापेक्ष साढ़े तीन करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व आना चाहिए था। हालांकि विभाग को महज 1.91 करोड़ रुपये ही मिल सके। अधिकारियों ने इसके पीछे का कारण तलाशना शुरू किया तो पता चला क थानेदारों की हीलाहवाली की वजह से बड़ी संख्या में वाहन कंडम हो गए। समय से वाहनों की नीलामी न होने की वजह से काफी वाहनों की स्थिति इतनी खराब हो चुकी थी कि वह बिकने योग्य ही नहीं थे। न्यूनतम दाम से भी कम रेट लगने की वजह से उन्हें बेचा नहीं जा सका। यही वजह है कि अब भी थानों में खड़े 5.75 करोड़ रुपये कीमत के 4931 वाहन नीलाम नहीं हो सके हैं।

थाने में खड़े जर्जर वाहन - फोटो : amar ujala
इन थानों में लगा सबसे ज्यादा वाहनों का ढेर
कमिश्नरी के 52 थानों में से पांच थाना प्रभारियों ने नीलामी में दिलचस्पी नहीं दिखाई। कलक्टरगंज में 143, बादशाहीनाका 19, चकेरी 345, शिवराजपुर 141 और साढ़ में 58 वाहन खड़े हैं लेकिन थानेदारों की वजह से एक भी वाहन नीलाम नहीं हो सका।

थाने में खड़े जर्जर वाहन - फोटो : amar ujala
यहां से मिले छह से 13 लाख रुपये
कल्याणपुर, बिठूर, सचेंडी, चौबेपुर, किदवईनगर, गोविंदनगर, काकादेव, कर्नलगंज, नवाबगंज, व ट्रैफिक लाइन।

वाहनों की नीलामी - फोटो : अमर उजाला
जब्त वाहन की नीलामी का ये है नियम
नियमानुसार लावारिस वाहन को जब्त किए जाने के छह माह बाद नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। वाहन बरामद होने पर पुलिस पहले उसे धारा 102 के तहत पुलिस रिकॉर्ड में लेती है। फिर न्यायालय को इसकी जानकारी दी जाती है। न्यायालय के निर्देश पर सार्वजनिक स्थानों पर पैम्फलेट आदि चस्पा कर वाहन की जानकारी सार्वजनिक की जाती है ताकि वाहन मालिक अपना वाहन वापस ले सके। इसके बाद वाहन नीलाम किए जाते हैं।
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पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार - फोटो : अमर उजाला
मालखाना में जब्त माल वाहनों के निस्तारण के लिए जोन के सभी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है। एसएचओ को मालखाना इंचार्ज और ज्यूडिशरी से तालमेल बनाकर लंबित मामलों को निस्तारण के लिए कार्रवाई की जा रही है।   -अखिल कुमार, पुलिस कमिश्नर
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