थाने में खड़े जर्जर वाहन
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4931 वाहन नहीं हो सके हैं नीलाम
अनुमान के अनुसार इन वाहनों के सापेक्ष साढ़े तीन करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व आना चाहिए था। हालांकि विभाग को महज 1.91 करोड़ रुपये ही मिल सके। अधिकारियों ने इसके पीछे का कारण तलाशना शुरू किया तो पता चला क थानेदारों की हीलाहवाली की वजह से बड़ी संख्या में वाहन कंडम हो गए। समय से वाहनों की नीलामी न होने की वजह से काफी वाहनों की स्थिति इतनी खराब हो चुकी थी कि वह बिकने योग्य ही नहीं थे। न्यूनतम दाम से भी कम रेट लगने की वजह से उन्हें बेचा नहीं जा सका। यही वजह है कि अब भी थानों में खड़े 5.75 करोड़ रुपये कीमत के 4931 वाहन नीलाम नहीं हो सके हैं।
थाने में खड़े जर्जर वाहन
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इन थानों में लगा सबसे ज्यादा वाहनों का ढेर
कमिश्नरी के 52 थानों में से पांच थाना प्रभारियों ने नीलामी में दिलचस्पी नहीं दिखाई। कलक्टरगंज में 143, बादशाहीनाका 19, चकेरी 345, शिवराजपुर 141 और साढ़ में 58 वाहन खड़े हैं लेकिन थानेदारों की वजह से एक भी वाहन नीलाम नहीं हो सका।
थाने में खड़े जर्जर वाहन
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यहां से मिले छह से 13 लाख रुपये
कल्याणपुर, बिठूर, सचेंडी, चौबेपुर, किदवईनगर, गोविंदनगर, काकादेव, कर्नलगंज, नवाबगंज, व ट्रैफिक लाइन।
जब्त वाहन की नीलामी का ये है नियम
नियमानुसार लावारिस वाहन को जब्त किए जाने के छह माह बाद नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। वाहन बरामद होने पर पुलिस पहले उसे धारा 102 के तहत पुलिस रिकॉर्ड में लेती है। फिर न्यायालय को इसकी जानकारी दी जाती है। न्यायालय के निर्देश पर सार्वजनिक स्थानों पर पैम्फलेट आदि चस्पा कर वाहन की जानकारी सार्वजनिक की जाती है ताकि वाहन मालिक अपना वाहन वापस ले सके। इसके बाद वाहन नीलाम किए जाते हैं।
पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार
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मालखाना में जब्त माल वाहनों के निस्तारण के लिए जोन के सभी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है। एसएचओ को मालखाना इंचार्ज और ज्यूडिशरी से तालमेल बनाकर लंबित मामलों को निस्तारण के लिए कार्रवाई की जा रही है। -अखिल कुमार, पुलिस कमिश्नर