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जिनके एंटीबॉडीज नहीं बनीं, उनके लिए संजीवनी है वैक्सीन, कोरोना विजेताओं पर टलेगा दोबारा संक्रमण का खतरा

Tue, 05 Jan 2021 10:05 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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भारत में कोरोना वैक्सीन - फोटो : iStock
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कानपुर में ऐसे रोगी जिनको कोरोना संक्रमण हुआ और दवाओं से ठीक हो गए लेकिन शरीर में एंटीबॉडीज नहीं बनीं, उनके लिए कोरोना की वैक्सीन संजीवनी है। उनको एक पुख्ता सुरक्षा कवर मिल जाएगा और दोबारा संक्रमण का खतरा टलेगा। कोरोना का दोबारा संक्रमण बहुत खतरनाक माना जा रहा है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना संक्रमण शरीर के अंदरूनी अंगों को क्षति पहुंचा देता है और दोबारा संक्रमण में स्थिति गंभीर हो जाती है। बताया जा रहा है कि 50 फीसदी लोगों में कोरोना की एंटीबॉडीज नहीं बन रही हैं। सीरो सर्वे और प्रदेश में अलग-अलग हुई कोरोना संक्रमितों की जांच में एंटीबॉडीज नहीं मिली हैं।
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इससे उन्हें दोबारा संक्रमण हो गया। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के दो डाक्टरों के साथ भी यही हुआ। वे संक्रमित हुए और ठीक हो गए। इसके बाद फिर संक्रमित हो गए। ब्लड ट्रांसफ्युजन विभाग में जब जांच की गई तो एंटीबॉडीज नहीं मिलीं। यही स्थिति प्रदेश स्तर पर हुए सर्वे में भी मिली है।

इस संबंध में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ की ब्लड ट्रांसफ्युजन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर तूलिका नेे बताया कि 50 फीसदी लोगों में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज नहीं बन रही है। ऐसा क्यों है? अभी पता नहीं, ऐसे लोगों को वैक्सीन से सुरक्षा कवर मिलेगा। उन्होंने बताया कि अभी बहुत से बिंदु शोध स्तर पर हैं।

इसके साथ ही जिनके एंटीबॉडीज बन गई हैं, वे भी वैक्सीन से फायदे में रहेंगे। संक्रमण के बाद जो एंटीबॉडीज बन रही हैं वे दो-ढाई महीने में वैसे ही खत्म हो जाती हैं। वैक्सीन की वजह से बनीं एंटीबॉडीज अधिक समय तक रहती हैं तो उन्हें मजबूती मिलेगी। कोवाक्सिन ट्रायल के चीफ इंवेस्टीगेटर प्रोफेसर जेएस कुशवाहा का कहना है कि वैक्सीन कारगर रहेगी। इससे सुरक्षा कवर का दायरा बढ़ जाएगा।
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