कानपुर। उत्तर प्रदेश क्रिकेट टीम रणजी ट्रॉफी का खिताब जीतने के लक्ष्य के साथ नए सत्र की तैयारियों में जुट गई है। जहां कप्तान, कोच और खिलाड़ियों पर विचार विमर्श चल रहा है, वहीं नए क्रिकेटरों को लेकर गुणा भाग की जा रही है। कामयाबी के रास्ते में आ रहे अवरोध को हटाया जा रहा है। प्रदेश की टीम ने वर्ष 2005-06 में मोहम्मद कैफ की कप्तानी में बंगाल को हराकर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया था। टीम दो बार (2007-08 और 2008-09) फाइनल में पहुंची, लेकिन खिताब नहीं जीत सकी।
अब आगामी रणजी सत्र के लिए उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के संतुलित संयोजन के साथ नई टीम उतारने की तैयारी कर रहा है। यूपी टी-20 लीग के समापन के बाद अगस्त में होने वाली यूपीसीए की बैठक में नए कप्तान, मुख्य कोच और घरेलू मुकाबलों के वेन्यू को अंतिम रूप दिया जा सकता है। रणजी ट्रॉफी 2026-27 का पहला चरण 11 अक्टूबर और दूसरा चरण 17 जनवरी 2027 से शुरू होगा। यूपीसीए की कोशिश है कि इस बार घरेलू मैदानों का पूरा फायदा उठाकर टीम जीत के साथ अभियान की शुरुआत करे और नॉकआउट तक पहुंचे। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ सत्रों में उत्तर प्रदेश की टीम घरेलू परिस्थितियों का लाभ उठाने में सफल नहीं हुई, जबकि मुंबई, बंगाल, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, विदर्भ और आंध्र प्रदेश की टीमें बेहतर प्रदर्शन कर लगातार नॉकआउट तक पहुंचीं। ऐसे में यूपीसीए संभावित खिलाड़ियों का मूल्यांकन कर रहा है। पूर्व क्रिकेटर व कार्यवाहक कोच ज्ञानेंद्र पांडेय की निगरानी में हाई परफॉर्मेंस कैंप आयोजित किए जा रहे हैं, जहां खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर अंतिम टीम चयन की तैयारी चल रही है। कैंप में खिलाड़ियों को बल्लेबाजी, गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण को परखने के साथ जहां भी कमियां मिली, उन्हें दूर किया गया। एकबार फिर से नए सत्र में यूपी की टीम से अपने दूसरे खिताब की उम्मीदें बनी हुईं हैं।