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Kanpur News: स्टेटस सिंबल और शौक के लिए विदेशी कुत्ते पाल रहे शहरी

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कानपुर। शहर में कुत्तों की अनोखी नस्ल के लोग दीवाने हैं। यहां डोगो अर्जेंटीनों, केन कार्सो, बीगल, अमेरिकन बुली जैसी प्रजातियों को लोगों ने बच्चों की तरह पाल रखा है। इन पर लाखों रुपये साल में खर्च करते हैं। शहर में काफी समय से ऐसा ट्रेंड चल पड़ा है, जहां लोग न केवल स्टेटस सिंबल के लिए बल्कि अपने खास शौक को पूरा करने के लिए अनोखी विदेशी नस्लें पाल रहे हैं।
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यशोदा नगर निवासी शशांक मिश्रा ने बताया कि उनके पास छह अलग-अलग ब्रीड के कुत्ते हैं। इन्हीं में अर्जेंटीना का डोगो अर्जेंटीनों दुनिया का सर्वश्रेष्ठ गार्ड डॉग है। ये अपने मालिक को सुरक्षा देने के साथ ही बकरी, भेड़, गाय, भैंस, आदि पालतू जानवरों की रक्षा भी करता है। शहर में इस ब्रीड का इकलौता कुत्ता 10 वर्षों से मेरे पास है। प्रदेश में ऐसे पांच से छह कुत्ते ही है। इसकी कीमत 40 से 50 हजार होती है। बाहर से आयात कराने पर एक लाख से ज्यादा रुपये खर्च होते हैं। इसे डॉग शो में भी गया है। यह कैनल क्लब ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित होने वाले राज्यस्तरीय डॉग शो में बेस्ट ऑफ ब्रीड के कई टाइटल अपने नाम कर चुका है। इनकी स्ट्रेंथ सबसे अच्छी होती है ये जल्दी थकते नहीं है। इन्हें डॉग फूड के अलावा चिकन, अंडे, फल के अलावा हरी सब्जियां भी खाता है। इनका वजन 60-70 किलो होता है।
केन कार्सो ब्रीड का कुत्ता इटली से आयात किया जाता है। इनका वजन 80 से 90 किलो होता है। इन होम फ्रेंडली कुत्तों का स्वभाव शांत होता है और कीमत एक से दो लाख तक है। शहर में ऐसे दो से तीन कूत्ते ही हैं। इसके अलावा बीगल ये टॉय डॉग बच्चों के साथ खेलने में माहिर होते हैं। ये कम खाते हैं और चूहों से खेतों की रक्षा करते हैं। ये अच्छे तैराक होते हैं। यूके ब्रीड के इन कुत्तों की कीमत 20 से 25 हजार रुपये है।
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राजीव विहार नौबस्ता निवासी सोनाली मिश्रा ने बताया कि उनके पास बीगल है, जो पांच साल से पाल रहे हैं। ये ब्रीड खरगोश, चूहों से बचाव के लिए खेतों में उपयोग किए जाते हैं। सोनाली ने बताया कि उन्हें जानवरों का बहुत शौक है। उन्होंने बिल्ली और कछुए भी पाल रखे हैं। अमेरिकन बुली भी पाला है। यह मेरी छह महीने की बेटी के साथ खेलता है। 20 से 22 हजार रुपये के होते हैं।




बारिश के मौसम में कुत्ते काटने के मामले आम दिनों की अपेक्षा दोगुने हो गए हैं। उर्सला, संक्रामक रोग, कांशीराम और सीएचसी में रोजाना करीब सौ मामले आ रहे हैं, जिन्हें रैबीज के इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। नए और पुराने मिलाकर 250 से ज्यादा इनकी संख्या है। आम दिनों में 50 और औसतन 120-130 मामले होते हैं। सर्दियों में ये आंकड़ा और बढ़ जाता है।
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