कानपुर। उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं प्रौद्योगिकी संस्थान की महिला उत्पीड़न कमेटी की चेयरपर्सन ने निदेशक पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। महिला प्रोफेसर का कहना है कि निदेशक ने दुर्भावना से उनके एनुअल परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट में अंक घटा दिए हैं। कई जगह इसकी शिकायत की, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
संस्थान में 2007 से रसायन विभाग में कार्यरत प्रोफेसर ने आरोप लगाया कि महिला होने के कारण उनके साथ पक्षपात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर साल प्रोफेसरों को उनके कार्य के अनुरूप एपीआर में अंक दिए जाते हैं जिनके आधार पर वे अन्य संस्थानों में आवेदन कर सकते हैं। अप्रेजल के अंक आठ होने पर ही प्रोफेसर इसके योग्य माने जाते हैं। इस वर्ष उनके नाम पर दो पेटेंट हैं, एक छात्र की पीएचडी डिग्री पूरी हुई है और दो अंतरराष्ट्रीय रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए हैं। वे फैकल्टी में अकेली महिला हैं और हॉस्टल वार्डेन, कल्चरल कमेटी, हार्टीकल्चर इंचार्ज, संस्थान की मैग्जीन एडिटर और महिला उत्पीड़न कमेटी की चेयरपर्सन जैसी जिम्मेदारियां निभा रही हैं।
प्रोफेसर ने आरोप लगाया कि उनके कार्यों के आधार पर एचओडी की ओर से दिए गए 8.62 अंकों को निदेशक ने घटाकर 7.91 कर दिया है। जबकि कई अन्य प्रोफेसरों को जिनके पास न तो पेटेंट है और न ही रिसर्च पेपर उनको नौ से ऊपर अंक दिए गए। उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल, राज्यपाल और महिला आयोग से भी शिकायत की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रोफेसर ने शिकायत में कहा है कि उनको कम अंक दिए जाने का कोई आधार नहीं बताया जा रहा है। पिछले सत्र में उन्हें 8.9 अंक दिए गए थे।
वहीं निदेशक डॉ. जी नलनकिल्ली ने आरोपों को गलत बताया। उनका कहना है कि प्रोफेसर को उनकी योग्यता के अनुरूप अंक दिए गए हैं। उन्हें 10 में से 7.89 अंक मिले हैं, जो अच्छे माने जाते हैं। पिछले कई सालों से प्रोफेसर को इसी ग्रेड के अंक मिलते आ रहे हैं।