उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (यूपीएसआईडीसी) अब प्रदेश के विभिन्न विकास प्राधिकरणों की तर्ज पर भूखंड आवंटन की प्रक्रिया अपनाएगा। संबंधित योजना का लेआउट बनाने के साथ ही आवंटन की प्रक्रिया शुरू होगी। आवंटियों को विकास के क्रम में भूखंड का मूल्य किस्तों में अदा करना होगा।
इसके अलावा यदि किसी स्कीम में भूखंड उपलब्ध नहीं हैं तो उसे मांग के हिसाब से भूखंड के मूल्य का दस फीसदी पैसा लेकर वेटिंग लिस्ट में रख दिया जाएगा। अभी तक निगम औद्योगिक क्षेत्र में 80 फीसदी विकास कार्य समाप्त करने के बाद उनका आवंटन करता था। मगर विकास कार्य के लिए धन के अभाव को देखते हुए आवंटन प्रक्रिया को प्राधिकरणों की तर्ज पर करने का फैसला किया गया है।
प्रबंध निदेशक की अध्यक्षता में गुरुवार को लखनऊ में हुई बोर्ड बैठक में यह तय हुआ है नए क्षेत्रों में भूखंड आवंटन डेवलपमेंट लिंक्ड प्लान की तरह होगा। इसमें मामूली राशि के साथ लेआउट के आधार पर आवेदकों को भूखंड आवंटित कर दिए जाएंगे।
इसके बाद संबंधित क्षेत्र में जैसे-जैसे विकास कार्य आरंभ होंगे, आवंटियों से किस्तों में पैसा लिया जाएगा। इसके अलावा एक अहम फैसला यह भी हुआ है कि यदि कोई उद्यमी वास्तव में भूखंड की आवश्यकता महसूस कर रहा है और जिस क्षेत्र में भूखंड चाहिए वहां के लिए कोई स्कीम जारी नहीं की गई तो उसे सीधे आवंटन किया जा सकेगा।
इसमें एक निश्चित अवधि में भूखंड पर उत्पादन कार्य करने और भूखंड की बिक्री न करने की शर्त होगी। इसके अतिरिक्त यदि किसी क्षेत्र में भूखंड की उपलब्धता है ही नहीं और कोई व्यक्ति आवेदन करता है तो मांग के हिसाब से दस फीसदी राशि देकर वह भूखंड की बुकिंग करा सकता है।
निरस्तीकरण या अन्य कारणों के चलते जैसे ही भूखंड की उपलब्धता होगी, उसे बुकिंग कराने वाले को आवंटित किया जाएगा। यदि तीन माह के भीतर कोई आवंटन नहीं होता है तो आवेदन का पूरा पैसा वापस कर दिया जाएगा। यह व्यवस्था आवास विकास की तर्ज पर की गई है।
इन फैसलों के पीछे तर्क दिया गया है कि बीते दो साल के भीतर यूपीएसआईडीसी ने प्रदेश भर के विभिन्न क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई बड़े पैमाने पर की। इसके चलते करीब 12 हजार 120 एकड़ से अधिक का लैंड बैंक निगम के पास है। भूमि अधिग्रहण में निगम का काफी पैसा खर्च हो गया है। इन धन की रिकवरी के लिए आवश्यक है कि अधिग्रहीत भूमि को आवंटित करके पैसा जुटाया जाए।
प्रदेश में उद्योगों के विकास के लिए बोर्ड बैठक में तमाम महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किए गए हैं। यह प्रयास किया गया है कि आवेदकों को जल्द से जल्द भूखंड आवंटित हो सके। मौजूदा औद्योगिक क्षेत्रों में फायर स्टेशनों की स्थापना से संबंधित एक योजना बनाई गई है। विकास के साथ भूखंड के मूल्य को किस्तों में लेने संबंधी महत्वपूर्ण प्रस्ताव को भी हरी झंडी दी गई है।
-मनोज सिंह, प्रबंध निदेशक (यूपीएसआईडीसी)