उत्तर प्रदेश के हरदोई में एक अक्तूबर से जोरशोर से शुरू हुए संचारी रोग नियंत्रण अभियान (दस्तक) को लेकर अब तक किए जा रहे दावों की पोल विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधियों ने खोल दी है। बीती 20 अक्तूबर को विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जनपद में दस्तक अभियान को लेकर भेजी गई रिपोर्ट में बाल विकास पुष्टाहार विभाग से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक के कार्यों के प्रति अंसतोष जताया गया है।
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आख्या मिलने के बाद डीएम ने नाराजगी जताई तो सीडीओ ने सीएमओ समेत चार अफसरों को चेतावनी भी जारी की है। संचारी रोग नियंत्रण अभियान के दौरान सभी विभागों को अलग-अलग जिम्मेदारियां और लक्ष्य दिए गए हैं। एक माह तक चलने वाले इस अभियान को लेकर डीएम अविनाश कुमार और सीडीओ निधि गुप्ता वत्स बेहद गंभीर हैं, लेकिन अलग-अलग विभागों के जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण न सिर्फ जिले की फजीहत हो रही है, बल्कि दस्तक अभियान का दम भी निकला जा रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधियों की ओर से रिपोर्ट मिलने के बाद सीडीओ निधि ने सीएमओ डॉ. सूर्यमणि त्रिपाठी, डीपीआरओ गिरीश चंद्र, डीपीओ बुद्धि मिश्रा और सीवीओ डॉ. जेएन पांडे से नाराजगी जताते हुए चेतावनी भी जारी की है।
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15 विकास खंडों में बाल विकास पुष्टाहार विभाग की गतिविधियां शून्य
विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, बाल विकास पुष्टाहार विभाग के आंगनबाड़ी कर्मियों को अभियान के दौरान कुपोषण से बचाने के लिए परिवारों से संपर्क कर उन्हें जागरूक करना था। जनपद में इस कार्य की प्रगति महज आठ फीसदी है। टोडरपुर, अहिरोरी, बावन, बेंहदर, भरखनी, बिलग्राम, हरियावां, हरपालपुर, कछौना, मल्लावां, संडीला, शाहाबाद, सुरसा, टडिय़ावां में एक भी परिवार को कुपोषण से बचाव के लिए जागरूक करने को आंगनबाड़ी कर्मी नहीं पहुंचे।
महज चार फीसदी गांवों में हुई फॉगिंग
रिपोर्ट के अनुसार, पंचायत राज विभाग ने गांवों में अभियान के दौरान फॉगिंग पर कोई ध्यान नहीं दिया। महज चार फीसदी गांवों में ही फॉगिंग कराई गई। अहिरोरी, बेंहदर, भरखनी, बिलग्राम, अहिरोरी, कछौना, मल्लावां, सांडी, संडीला, शाहाबाद, सुरसा, टड़ियावां और टोडरपुर विकास खंडों में किसी भी गांव में फॉगिंग नहीं हुई। विशेष स्वच्छता अभियान की स्थिति भी अच्छी नहीं मिली। अहिरोरी, माधागंज, टड़ियावां में स्वच्छता अभियान की स्थिति शून्य बताई गई है। भरखनी और शाहाबाद में चालीस फीसदी व टोडरपुर ओर बेंहदर में तीस तीस फीसदी गांवों में ही स्वच्छता अभियान चला है।
अभियान के क्रिया कलापों में स्वास्थ्य विभाग ही साबित हुआ फिसड्डी
संचारी रोग नियंत्रण अभियान में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग के क्रियाकलापों की स्थिति अच्छी नहीं मिली। दस्तक अभियान की जागरुकता के लिए वॉल पेंटिंग महज दो फीसदी क्षेत्र में ही हुई। अधिकांश विकास खंडों में वॉल राइटिंग नहीं कराई गई। एंटी वायरल एक्टिविटी भी स्वास्थ्य विभाग के अधीन जनपद में नहीं हुईं।
महज 13 फीसदी ग्रामीण इलाकों में आंगनबाड़ी कर्मियों के साथ आशा अभियान के दौरान गईं। महज 42 फीसदी ग्रामीण इलाकों में परिवारों को तेज बुखार आने पर किए जाने वाले उपायों के प्रति जागरुक किया। हाथ धोने के तरीके सिर्फ 50 फीसदी परिवारों को ही बताए गए। मच्छरों और अन्य संक्रामक रोगों के स्रोतों के बारे में भी पचास फीसदी लोगों को ही जानकारी दी गई।
डीएम ने जताई नाराजगी, तो सीडीओ ने दी चेतावनी
विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से रिपोर्ट मिलने के बाद डीएम अविनाश कुमार ने स्थिति पर नाराजगी जताई है। उन्होंने दस्तक अभियान की सभी गतिविधियों को गंभीरता से लेकर शत-प्रतिशत कार्य कराने की नसीहत अफसरों को दी है। उधर, दूसरी ओर सीडीओ निधि गुप्ता वत्स ने सीएमओ, डीपीओ,डीपीआरओ और सीवीओ को पत्र जारी कर पूरी स्थिति पर नाराजगी जताते हुए चेतावनी जारी की है।