रविवार को परिणाम घोषित हुए तो पता चला कि उनकी मेहनत रंग लाई और सरोजनी ने 452 वोट पाकर प्रतिद्वंद्वियों का मुंह बंद कर दिया। वहीं, चुनौती देने वाले सोनू को 297 वोट ही मिले।
इंसान अगर मन में कुछ करने की ठान ले और सच्ची लगन से लग जाए तो कुछ भी असंभव नहीं। बिधनू ब्लॉक के हरबसपुर क्षेत्र पंचायत से बीडीसी का चुनाव लड़ने वाली एक मजदूर की पत्नी इसकी ताजा नजीर बन गई है। एक बीडीसी प्रत्याशी की चुनौती को स्वीकार करते हुए महिला के पति ने कामकाज छोड़कर चुनाव की तैयारी में दिनरात एक कर दिया।
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रविवार को जब परिणाम आया तो चुनौती देने वाले चित नजर आए। हरबसपुर गांव में रहने वाले मूलचंद्र पासी ने बताया कि वह मजदूरी कर परिवार चलाते हैं। घर के नाम पर गांव में एक झोपड़ी है, जिसमें पत्नी सरोजनी के साथ रहते हैं।
दो वक्त की रोटी के लिए रोज सुबह निकल जाते हैं और रात को राशन लेकर लौटने पर पूरे परिवार के साथ पेट भरते हैं। बताया कि उन्हें चुनाव के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और न ही कभी पत्नी को चुनाव लड़ाने के बारे में सोचा था। एक दिन बीडीसी का चुनाव लड़ रहे सोनू पासी ने उन्हें चुनौती देते हुए कहा कि अगर चुनाव लड़ जाओ तो दो वोट भी नहीं मिलेंगे।
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उनकी इस चुनौती को उस वक्त स्वीकार तो कर लिया, लेकिन कोई जानकारी न होने से मन व्यथित भी था। इस बीच, गांव के कुछ लोगों ने उनका समर्थन कर हौसला बढ़ाया। इस पर कामकाज छोड़कर चुनाव की तैयारी में जुट गए। महिला सीट होने पर पत्नी को बीडीसी पद का प्रत्याशी बनाया। रविवार को परिणाम घोषित हुए तो पता चला कि उनकी मेहनत रंग लाई और सरोजनी ने 452 वोट पाकर प्रतिद्वंद्वियों का मुंह बंद कर दिया। वहीं, चुनौती देने वाले सोनू को 297 वोट ही मिले।