उत्तर प्रदेश के कन्नौज में दुष्कर्म पीड़िता किशोरी के गर्भपात की संभावनाओं से इनकार के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पैनल से स्वास्थ्य की निगरानी का फैसला लिया है। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की स्थिति के कारण सप्ताह में एक बार महिला चिकित्सकों की टीम घर जाएगी।
गांव की आशा कार्यकर्ता रोजाना एक बार स्वास्थ्य की जानकारी कर अधिकारियों को रिपोर्ट करेंगी। कोतवाली क्षेत्र के गांव दाईपुर में रहने वाले आरोपी करन पुत्र मोतीलाल करीब एक साल से गांव की 13 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म कर रहा था। इससे वह गर्भवती हो गई।
सात अक्तूबर 2020 को पीड़िता की मां ने करन सिंह, उसके भाई और पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। मंगलवार को जिला एवं सत्र न्यायालय के पॉक्सो एक्ट कोर्ट ने गर्भवती पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कर गर्भपात कराने पर राय जानने के लिए सीएमओ डॉ. कृष्ण स्वरूप को आदेश पत्र भेजा था।
सीएमएस डॉ. शक्ति बसु के निर्देश पर डॉ. अंकिता और डॉ. निधि गोयल के पैनल ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण किया था। इसमें वह आठ माह की गर्भवती निकली थी। इससे महिला चिकित्सकों ने गर्भपात की संभावनाओं से इनकार कर दिया। कम उम्र में गर्भवती होने से चिकित्सकों ने हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की स्थिति बताई थी।
सीएमओ डॉ. कृष्ण स्वरूप ने बताया कि पीड़िता के गांव की आशा कार्यकर्ता को रोजाना पीड़िता के स्वास्थ्य की रिपोर्टिंग करने को कहा गया है। इसके अलावा जल्द महिला चिकित्सकों का पैनल गठित किया जाएगा। इससे कि उसकी बेहतर देखभाल और उपचार हो सके।