सदर विधानसभा में मौदहा कस्बा सहित आसपास के गांवों में अल्पसंख्यक समुदाय के करीब 40 हजार मतदाता हैं। बीते चुनावों का इतिहास बताता है कि अल्पसंख्यक समुदाय से लोकदल से डॉ. समीम जाफरी व कम्युनिस्ट पार्टी के मो. अहमद चुनाव लड़े और बेहद कम अंतर से पराजित हुए थे।
हमीरपुर जिले में विधानसभा चुनाव में यहां के अल्पसंख्यक मतदाता प्रत्याशी के भविष्य का फैसला करने में अहम भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि सपा, बसपा व कांग्रेस की नजर अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं पर एक बार फिर आकर टिक गई है।
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सदर विधानसभा में मौदहा कस्बा सहित आसपास के गांवों में अल्पसंख्यक समुदाय के करीब 40 हजार मतदाता हैं। बीते चुनावों का इतिहास बताता है कि अल्पसंख्यक समुदाय से लोकदल से डॉ. समीम जाफरी व कम्युनिस्ट पार्टी के मो. अहमद चुनाव लड़े और बेहद कम अंतर से पराजित हुए थे।
लेकिन सपा व बसपा गठबंधन से बशीरुद्दीन चुनाव लड़कर जीत दर्ज करा चुके हैं। इसी के बाद अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं का रुझान अधिकांश सपा की ओर रहा है। हालांकि पहली बार आए राहुल गांधी ने मांचा गांव में रात विश्राम किया। इस गांव के साथ गुसियारी में भी चौपाल लगाई।
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जिसका अल्पसंख्यक मतदाताओं पर खासा असर पड़ा था। लंबे समय से सपा का दामन थामने वाले मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी संख्या कांग्रेस में चली गई। इस चुनाव में कांग्रेस, बसपा और सपा के राजनीतिक धुरंधर अल्पसंख्यक मतदाताओं में अपनी पैठ बनाने में जुटे हैं। यह आगामी 10 मार्च के बाद ही यह पता चल सकेगा कि ऊंट किस करवट बैठेगा।