कई प्रदेशों के हजारों लोेगों से करीब सौ करोड़ रुपये की ठगी करने वाली गोरखपुर की फाइनेंस कंपनी गैब ग्राम्य विकास क्रेेडिट कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच शुरू कर दी है। ईडी ने प्रदेश के कई जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर कंपनी के संचालकों की संपत्तियों का ब्यौरा मांगा है।
इसमें कानपुर के किदवई नगर निवासी गिरीश शर्मा, उनकी पत्नी ममता शर्मा व पुत्र मुकुल शर्मा भी शामिल हैं। गोरखपुर के राप्तीनगर निवासी राजेश कुमार पांडेय और अष्टभुजा पांडेय ने गैब फाइनेंस कंपनी की शुरुआत की थी। कानपुर के गिरीश शर्मा कंपनी में चीफ जनरल मैनेजर थे। लखनऊ में हेड ऑफिस और अन्य प्रदेशों में इसकी शाखाएं खोली गई थीं।
कंपनी भारत सरकार का उपक्रम बताकर धन दोगुना करने के नाम पर लोगों से कई योजनाओं में पैसा जमा करवाती थी। वर्ष 2017 में कंपनी अपने दफ्तर बंदकर भाग गई। बताया जाता है कि इसमें करीब 100 करोड़ रुपये की ठगी हुई। इस मामले में कई प्रदेशों में अलग-अलग जिलों में राजेश कुमार पांडेय, अष्टभुजा पांडेय, गिरीश शर्मा के अलावा दर्जनों लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थीं।
ठगी की रकम संपत्तियों में खपाई
अब इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने दखल दिया है। धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत हुई अब तक की जांच में सामने आया है कि कंपनी के संचालकों और अधिकारियों ने संगठित होकर लोगों को ठगने का व्यवसाय शुरू किया। ठगी की रकम को संपत्तियों में निवेश किया गया।
कानपुर समेत कई बड़े शहरों में संपत्तियां खरीदी गईं। इसी आधार पर निदेशालय के उप निदेशक प्रकाश चौधरी ने डीएम से जानकारी मांगी है कि गिरीश शर्मा, उनकी पत्नी ममता शर्मा व पुत्र मुकुल शर्मा के नाम पर कानपुर में कितनी संपत्तियां रजिस्टर्ड हैं। उन संपत्तियों का सर्किल और बाजार मूल्य क्या है? ये संपत्तियां कब और किससे खरीदी गईं?
यूपी, हरियाणा और बिहार में ज्यादा ठगी
वर्ष 2017 में कंपनी के फरार होने के बाद कई जिलों से लोगों के ठगी का शिकार होने की खबरें आई थीं। बताते हैं कि इसमें उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा में ज्यादा लोग ठगे गए। हालांकि कंपनी ने अपना जाल मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब और उत्तराखंड में भी फैला रखा था।