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आईआईटी से मोतीझील तक मेट्रो का सिग्नल कार्य लगभग पूरा, डिपो में पहली ट्रेन के ट्रायल रन की तैयारी

Thu, 14 Oct 2021 11:01 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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डिपो में पहली मेट्रो ट्रेन के ट्रायल रन की तैयारी - फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कारपोरेशन र्ने आईआईटी से मोतीझील के बीच सिग्नल लगाने का काम लगभग पूरा कर लिया है। गुरुवार को डिपो में पहली मेट्रो ट्रेन दौड़ाने से पहले सिगनल सिस्टम का परीक्षण हुआ। कानपुर मेट्रो के प्राथमिकता वाले कॉरिडोर (आईआईटी से मोतीझील) पर अगले महीने ट्रायल रन प्रस्तावित है।
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इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सिग्नल सिस्टम के परीक्षण का कार्य शुरू कर दिया गया है। गुरुदेव चौराहे के पास स्थित मेट्रो डिपो में पहली ट्रेन को टेस्टिंग के लिए तैयार किया जा रहा है। ट्रेन की टेस्टिंग से पूर्व सिगनल सिस्टम चालू कर परीक्षण की प्रक्रिया चालू कर दी गई है। इसे ‘सिग्नलिंग पॉवर ऑन टेस्ट’ बोला जाता है।

मेट्रो डिपो, मेनलाइन पर सिग्नल लगाने का काम लगभग पूरा
मेट्रो डिपो में 29 सिग्नल लगने हैं, जिनमें से 27 लग गए हैं। वहीं लगभग 9 किलोमीटर लंबी मेनलाइन पर कुल 43 सिग्नल लगने हैं, जिनमें से 35 को इंस्टॉल कर दिया गया है। अब सिर्फ मोतीझील स्टेशन पर सिग्नल लगाने का काम चल रहा है, प्राथमिक रूट के अन्य 8 मेट्रो स्टेशनों, मेट्रो ट्रैक पर सिग्नल लगा दिए गए हैं।
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मेट्रो ट्रेन को मिलेंगे इन रंगों के सिग्नल
मेट्रो ट्रैक पर लगे सिग्नलों में तीन रंग होंगे, लाल, बैंगनी (वॉयलेट) और हरा। लाल रंग ट्रेन को रुकने का संकेत देगा, जबकि बैंगनी रंग का सिग्नल होने पर ट्रेन को एक निर्धारित गति सीमा पर आगे बढ़ने की अनुमति होगी। इस रंग का संकेत तब मिलता है, जब ट्रैक पर कुछ ही दूरी पर दूसरी ट्रेन भी मौजूद हो। हरा रंग, आगे का रूट पूरी तरह से क्लियर होने का संकेत देगा और ट्रेन अपनी पूरी गति के साथ आगे बढ़ सकेगी।

डिपो में सफेद सिग्नल 
डिपो में ट्रेन के मूवमेंट के निर्धारण के लिए सफेद रंग का भी सिग्नल होता है। इस सिग्नल में लगीं तीन लाइटों में दो, जब हॉरिजॉन्टल जलती हैं तब ट्रेन के लिए रुकने का संकेत होता है और जब दो लाइटें 45 डिग्री के कोण पर जलती हैं, तब ट्रेन के लिए चलने का संकेत होता है। इस सिग्नल को ‘शंट सिग्नल’ कहा जाता है।
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