उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित राजकीय बालिका गृह की 57 बालिकाओं के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने को बड़ी लापरवाही मानते हुए प्रदेश सरकार ने देर से ही सही लेकिन यहां की अधीक्षिका मिथलेश पाल और जिला प्रोबेशन अधिकारी अजीत कुमार को निलंबित कर दिया है।
निलंबन की अवधि में इन दोनों अधिकारियों को वेतन का 50 प्रतिशत हिस्सा ही मिलेगा। पहले बाल संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ शुचिता चतुर्वेदी, उसके बाद महिला कल्याण विभाग की अपर मुख्य सचिव राधा चौहान और विभाग के निदेशक मनोज राय ने बाल संरक्षण गृह का निरीक्षण करके बालिकाओं और पाक्सो पीड़ित गर्भवती लड़कियों की सुरक्षा में भारी चूक बताई थी।
उन्होंने रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेजी था। इस पूरी कवायद के 24 घंटे के भीतर दोनों अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया गया। इन दोनों अधिकारियों पर आरोप है कि बाल संरक्षण गृह में रह रहीं गर्भवती लड़कियों को चिकित्सीय सुविधा दिलाने के लिए यहां के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को उनके साथ हॉस्पिटल भेजा जाता था और जब उस कर्मचारी को कोरोना संक्रमण आया तो उसे उसी बाल गृह में रहने दिया गया।
जिसकी वजह से 57 बालिकाओं में कोरोना संक्रमण फैल गया। यह भी आरोप लगाया गया है कि जब दो लड़कियों में हेपेटाइटिस और एचआईवी पीड़ित होने की बात सोशल मीडिया के जरिए बाहर आई तब इन अधिकारियों ने इसका खंडन नहीं किया।