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UP Board Topper: ये हैं कानपुर के टॉपर्स, कोई सिविल सेवा में तो कोई मेडिकल में जाना चाहता है, पढ़ें इनकी कहानी

Sat, 20 Apr 2024 10:29 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: यूपी बोर्ड की ओर से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद बच्चों की सफलता का जश्न स्कूल, घर से लेकर सोशल मीडिया तक मना। अभिभावकों और शिक्षकों ने बच्चों का मुंह मीठा कराया। बच्चों ने साथियों के साथ हिप हिप हुर्रे... बोलकर खुशी का इजहार किया।
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खुशी से झूमते छात्र-छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से जारी यूपी बोर्ड के परिणाम में शहर के मेधावियों का प्रदेश की टॉप-10 सूची में दबदबा रहा। हाईस्कूल में 10 और इंटरमीडिएट के 33 छात्रों ने प्रदेश में नाम रोशन किया है। वहीं, पहली बार शहर की टॉप-10 सूची में हाईस्कूल और इंटर में कुल 140 छात्र-छात्राओं ने जगह बनाई है।

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इस बार हाईस्कूल का परिणाम 94.98 फीसदी और इंटरमीडिएट का परिणाम 87.25 फीसदी रहा है। पिछले साल के मुकाबले हाईस्कूल का परिणाम .57 फीसदी और इंटर का परिणाम 6.83 फीसदी बढ़ा है। बीते साल हाईस्कूल का परिणाम 94.41 और इंटर का परिणाम 80.42 फीसदी गया था।
हाईस्कूल में 97.33 फीसदी अंकों के साथ वीपी इंटर कॉलेज लक्ष्मणपुर की स्वाती, शिवाजी इंटर कॉलेज अर्रा के अभिषेक साहू, खुशी द्विवेदी और पं. गुरुप्रसाद गयाप्रसाद इंटर कॉलेज नौरंगा के राज प्रदेश में सातवें और जिले में पहले स्थान पर रहे हैं। इन सभी को 97.33 प्रतिशत अंक मिले हैं। वहीं, इंटर में शिवाजी इंटर कॉलेज अर्रा के छात्र आदित्य कुमार कुमार ने 97.40 फीसदी अंक पाकर प्रदेश में तीसरी और जिले में पहली रैंक पाई है।

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राज ने यूट्यूब से की पढ़ाई, खुद बनाए नोट्स
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल की परीक्षा में गुरु प्रसाद ज्ञान प्रसाद इंटर कालेज के छात्र राज ने 584 यानी 97.33 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। राज ने प्रदेश में सातवां और जिले में पहला स्थान प्राप्त किया है। राज का कहना है कि वह रोजाना ऑनलाइन दो घंटे यूट्यूब से पढ़ाई करते थे। मोबाइल फोन से दूरी बनाकर रखी। राज ने बताया कि वह कभी कोचिंग नहीं गए, किताबों से नोट्स बनाए और पढ़ा। उनका कहना है कि पढ़ाई तब ही कर जब मन होता था। मैथ और साइंस में उन्हें ज्यादा रुचि है। कॉलेज के प्रिंसिपल वेद प्रकाश द्विवेदी ने बताया कि राज कभी भी क्लास मिस नहीं करता था। राज के पिता दीपू खेती किसानी करने के साथ पान बेचने का काम करते हैं। राज ने बताया की उनकी मां विनीता गृहिणी हैं।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहते हैं आदर्श पटेल
आदर्श विहार श्यामनगर निवासी आदर्श पटेल ने 96.5 प्रतिशत अंक लाकर जिले में पांचवां स्थान पाया है। गांधीग्राम स्थित पटेल सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के छात्र आदर्श सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहते हैं ताकि तकनीकी से वह देश को आगे बढ़ाने में योगदान दे सकें। आदर्श ने बताया कि सोशल मीडिया पर उनका कोई अकाउंट भी नहीं है। उन्होंने कहा कि टाइम टेबल से पढ़ाई कर सफलता पाई है। परीक्षा से पहले मॉडल पेपर और अनसॉल्वड पेपर हल किए। उन्होंने सफलता का श्रेय मां शशिकांत पटेल और पिता टेनरी कर्मी जयदीप के साथ स्कूल के प्रबंधक आरके सिंह और प्रिंसिपल राजीव रत्न सिंह को दिया। आदर्श ने गणित विषय में शतप्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। साइंस में 94 इंग्लिश में 97, हिंदी में 97, संस्कृत में 94, सोशल साइंस में 97 अंक पाए है।

आईआईटी से इंजीनियरिंग करने का है लक्ष्य
सागरपुरी की रहने वाली अंशी पांडेय ने 578 अंक हासिल कर जिले में छठवां स्थान हासिल किया है। अंशी ने बताया कि पिता कृष्ण बिहारी पांडेय व्यापारी और मां मनीषा पांडेय गृहिणी हैं। अंशी कहती हैं कि उनके स्कूल से फोन आया कि जिले में छठवां स्थान मिला है तो मां के साथ वह खुशी से झूम उठीं। वह आईआईटी से इंजीनियर बनकर पिता के सपने को पूरा करना चाहती हैं। टाइम टेबल तैयार कर उन्होंने साल भर तैयारी की। अंशी ने हिंदी में 97, अंग्रेजी में 94, गणित में 97, विज्ञान में 97, कला में 96, सोशल साइंस में 97 अंक हासिल किए हैं।

प्राइवेट कर्मी की बेटी का जिले में आठवां स्थान
सागरपुरी की ही रहने वाली सृष्टि बाजपेई ने भी जिले में आठवां स्थान पाया है। सृष्टि ने बताया कि पिता अखिलेश बाजपेयी प्राइवेट कर्मी और मां रिचा बाजपेई गृहिणी हैं। उन्होंने बताया कि हाईस्कूल की परीक्षा में अच्छे अंक आएं, इसके लिए स्कूल के शिक्षकों ने जैसा पढ़ाया, उसी को घर पर भी दोहराया। स्कूल में हर विषय को विस्तार से समझाया जाता है, ऐसे में इसी प्रकार की शंका नहीं रहती थी। भविष्य में यूपीएससी के माध्यम से अधिकारी बनकर वह देश की सेवा करना चाहती हैं। सृष्टि के हिंदी में 97, अंग्रेजी में 97, गणित 97, विज्ञान 94, सोशल साइंस में 97, कला में 96 अंक हैं।

किसान के बेटी ने पाया प्रदेश में नौवां स्थान
हाईस्कूल की परीक्षा में सरदार पटेल इंटर कॉलेज जरौली की छात्रा अंशिका साहू ने प्रदेश में नौवां स्थान पाया है। अंशिका के पिता ध्रुव कुमार साहू किसान और मां शोभा गृहिणी हैं। सेन पश्चिम पारा निवासी अंशिका रोज अपने गांव से साइकिल से स्कूल आती हैं। 15 किमी आना-जाना पड़ता है। घर पर दो बहनें और एक भाई है। उनका कहना कि पिता की कड़ी मेहनत को भविष्य में आईएएस अधिकारी बनकर सफल करना ही जीवन का एकमात्र लक्ष्य है। अंशिका ने हिंदी में 93, अंग्रेजी में 96, गणित में 99, साइंस में 98, सोशल साइंस में 98 व कला में 99 अंक हासिल किए हैं।

फूटपाथ सब्जी दुकानदार की बेटी अवनी साहू
कहते हैं कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। जहां चाह वहां रास्ते खुदबखुद बन जाते हैं। जिसका उदाहरण यादव नगर अहिरवां निवासी कन्हैयालाल साहू की बेटी अवनी साहू ने पेश किया है। पिता रामादेवी में फुटपाथ पर सब्जी बेंचकर परिवार संग गुजर बसर करते हैं। यह देख ने कठिन मेहनत व लगन के बलपर हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा परिणाम में 573 अंक (95.5 प्रतिशत) प्राप्त किए। वह अहिरवां स्थित बीएलएम इंटर कॉलेज की छात्रा हैं। अवनी का सपना नीट परीक्षा में सफल होकर एमबीबीएस डॉक्टर बनने का है। जिससे वह गरीबों व जरूरतमंदों की सेवा कर सकें।वह अपनी सफलता का कारण नियमित टाइम टेबल से पढ़ाई बताया। कहा कि जिस विषय में जो पढ़ाया गया। उसे उसी दिन घर पर पढ़ा। जो डाउट निकले उसे स्कूल में संबंधित टीचर से दूर कर लिया। बताया कि उनका उत्साह मां सुधा व पिता के अलावा स्कूल के प्रबंधक जेपी मौर्य व प्रिंसिपल एसके मौर्य ने बढ़ाया। कहा कि मेहनत से पढों , बाकी चिंता न करो। अब वह औऱ मेहनत व लगन से पढ़ेगी। अवनी ने अपनी कठिन मेहनत से गणित में 98, साइंस में 97, हिंदी में 97, इंग्लिश में 96 सोशल साइंस में 93 व आर्ट में 92 अंक अर्जित किए।

एलआईसी एजेंट के बेटे ने इंटर में पाए 95.6%अंक
नारामऊ में रहने वाले एलआईसी एजेंट नफीस आलम के बेटे याकूब नफीस ने इंटरमीडिएट की परीक्षा में 500 में 478 अंक पाकर परिवार का नाम रौशन किया।याकूब कल्याणपुर के कैलाश सरस्वती इंटर कालेज का छात्र है। याकूब नफीस ने बताया वह उसका लक्ष्य आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग की पढाई करना है। घर मे इन्वर्टर नहीं है। बिजली जाने पे वह अपने चाचा के घर जाकर पढ़ाई करता था। राजनीति पसंद नहीं है और रोहित शर्मा उनके पसंददीदा क्रिकेटर है।

अनिकेत को मिला प्रदेश में पांचवां, शहर में दूसरा स्थान
संजयगांधीनगर निवासी अनिकेत साहू के इंटर की परीक्षा में 485 अंक पाए हैं। उन्हें प्रदेश में पांचवां और शहर में दूसरा स्थान मिला है। एक निजी फर्म में कंप्यूटर ऑपरेटर दिनेश कुमार और गृहिणी सुमन के बेटे अनिकेत आईआईटी दिल्ली से बीटेक करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि रोजाना सात से आठ घंटे तक पढ़ाई कर सफलता पाई है। उन्होंने कोचिंग पढ़ने की जगह सेल्फ स्टडी को महत्व दिया है। उन्हें राजनीति पसंद नहीं है लेकिन वह देश को मजबूत बनाने के लिए निष्पक्ष चुनाव को जरूरी मानते हैं। उनके अंग्रेजी ,फिजिक्स, केमिस्ट्री में 97-97, हिंदी में 96 और गणित में 98 अंक आए हैं। वह देश-दुनिया की जानकारी के लिए मोबाइल की अपेक्षा अखबार को ज्यादा बेहतर मानते हैं।

प्वांइट टू प्वाइंट लिखे, जवाब रटे न हो
बीएनएसडी शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज के छात्र प्रत्युष गुप्ता ने 96 फीसदी अंक हासिल किए हैं।  उन्होंने कहा कि परीक्षा में जितना पूछा जाएं, उतना ही लिखना चाहिए। प्वाइंट टू प्वाइंट लिखें। विस्तृत प्रश्नों में रटे जवाब देने से बचे। स्वयं के नोट्स बनाकर उत्तर दें। प्रत्युष को 10वीं में 93.7 फीसदी अंक मिले हैं। हटिया निवासी पिता प्रदीप गुप्ता बिजनेसमैन और मां ललिता गुप्ता गृहिणी हैं। बड़ा भाई भी बिजनेसमैन है, लेकिन वह कॉरपोरेट में जॉब करना चाहते हैं। कहते हैं कि स्वयं की मेहनत से मिली जॉब की बात अलग होती है। हालांकि कुछ साल जॉब करने के बाद स्टार्टअप का ही प्लान है।

स्कूल मदद न करता तो न पढ़ पाती
बीएनएसडी शिक्षा निकेतन की छात्रा अंजू कुमारी ने 12वीं की परीक्षा में 96.6 फीसदी अंक हासिल किए है। उन्होंने कहा कि पढ़ाई में स्कूल ने बहुत मदद की है, शायद स्कूल मदद न करता तो पढ़ भी ना पाती। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। लेकिन स्कॉलरशिप की मदद से आगे बढ़ती गई। चुन्नीगंज निवासी पिता कामता प्रसाद निजी कंपनी में काम करते हैं मां जमुरता गृहिणी हैं। मेडिकल के क्षेत्र में जाना चाहती हूं, काफी मेहनत कर रही हूं ताकि सरकारी कॉलेज मिल सके।

स्कूल के लिए रोज तय करता 26 किमी का सफर
बीएनएसडी शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज के छात्र शशि शेखर बाजपेई ने हाईस्कूल में 96.3 फीसदी अंक हासिल किए हैं। यशोदा नगर निवासी शशि को पढ़ाई के लिए रोजाना 26 किमी का सफर तय करना पड़ता था। उनको पिता सुधांशु बाजपेई स्कूल लेने और छोड़ने आते। शशि कहते हैं कि उनके पिता इंश्योरेंस एजेंट और मां अनुपमा बाजपेई गृहिणी है। पारिवारिक स्थिति ठीक न होने पर स्कूल ने काफी सहयोग किया। शशि रिसर्च के क्षेत्र में जाना चाहते हैं। फिजिक्स उनका पसंदीदा विषय है।

खुद नोट्स बनाकर की पढ़ाई, पाई सफलता
ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन की छात्रा देवांशी तिवारी ने हाईस्कूल में 96 फीसदी अंक प्राप्त किए हैं। जिले में आठवीं रैंक अर्जित करने वाली देवांशी तिवारी सिकंदरा की रहने वाली हैं। विद्यालय के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही हैं। वह कहती हैं कि सोशल मीडिया से दूरी बनाकर खुद नोट्स तैयार किए और उन्हीं से पढ़कर यह मुकाम पाया है। छात्र रटने के बजाय लिखकर और स्वयं के नोट्स से पढ़ाई करें तो अच्छा प्रभाव पड़ता है। बिजनेसमैन पिता योगेंद्र कुमार तिवारी और शिक्षिका मां आरती तिवारी की बेटी मेडिकल के क्षेत्र में जाना चाहती हैं। वह कहती हैं कि निरंतर मेहनत से ही सफलता पाई जा सकती है।

स्टार्टअप करना चाहती हैं अपर्णा
ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन की छात्रा अर्पणा सिंह ने हाईस्कूल में 95.8 फीसदी अंक हासिल किए हैं।
गुमटी निवासी अपर्णा कहती हैं कि अंक उम्मीद से थोड़े कम रह गए हैं। बिजनेसमैन पिता राहुल सिंह गौर और गृहिणी मां साधना सिंह की बेटी इंजीनियरिंग के बाद स्टार्टअप करना चाहती हैं। उन्होंने सभी से चुनाव में अपने मत का उपयोग करने की अपील की। अर्पणा कहती हैं कि अपने मत का प्रयोग अपने विवेक से करें। सफलता का श्रेय स्वयं की मेहनत, शिक्षकों और अभिभावकों को दिया।

अमर उजाला के सहयोग से पढ़े अर्पित ने हाईस्कूल में पाए 94.66 प्रतिशत अंक
कोरोना काल के दौरान अपने अभिभावकों को खोने वाले अर्पित सिंह को हाईस्कूल की परीक्षा में 94.66 फीसदी अंक मिले हैं। अमर उजाला की पहल पर ही ओंकारेश्वर सरस्वती ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन ने अर्पित और उनकी बहन अंतरा को गोद लिया था। दोनों बच्चों का दाखिला ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन न्यू आजादनगर में हुआ था। ग्रुप के संरक्षक डॉ. अंगद सिंह, एमडी डॉ. पूजा अवस्थी और प्राचार्य राम मिलन सिंह ने अभिभावकों की तरह बच्चों की पढ़ाई के अलावा रहने, खाने-पीने की जिम्मेदारी वहन की है। कैंसर से पिता शंकर सिंह और कोरोना से मां निशा सिंह को खोने वाले सातवीं कक्षा के छात्र अर्पित के कंधों पर पांच साल की बहन की जिम्मेदारी आ गई थी। उस दौरान अमर उजाला ने ओंकारेश्वर ग्रुप से बच्चों को गोद लेना का आग्रह किया, जिसे ग्रुप ने स्वीकार कर लिया। डॉ. पूजा कहती हैं कि अंतरा तो कभी स्कूल नहीं गई थी और अर्पित सातवीं कक्षा में था। दोनों ही बच्चों को सही मार्गदर्शन दिया और बच्चों ने भी उसे सहजता से अपनाया। अर्पित कहते हैं कि आज जो कुछ हो स्कूल की वजह से हूं। हालांकि नंबर उम्मीद से थोड़े कम रह गए, लेकिन 12वीं के लिए कड़ी मेहनत करूंगा। उनका लक्ष्य आईआईटी से इंजीनियरिंग करना है।

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पान मसाला बेंचने वाले के बेटे का शहर में पांचवां स्थान
जरौली फेस वन निवासी विनीत कुमार शुक्ला पान मसाला बेंचते हैं। शशांक और हर्षित उनके दो बेटे हैं। कम आमदनी, महंगाई और आर्थिक संकटों के चलते जहां विनीत अपने खर्चों में कटौती कर लेते हैं, वहीं वह बेटों की फीस भरने और उनकी पढ़ाई के लिए महंगी किताबों को खरीदने में कोई कमी नहीं करते हैं। चह चाहते तो हैं कि उनके और ज्यादा अच्छी शिक्षा के लिए कोचिंग भी पढ़े, लेकिन महंगी फीस के चलते वह ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। जहां बड़ा बेटा शशांक इन दिनों बीएससी कर रहा है। वहीं उनके छोटे बेटे हर्षित शुक्ला ने 96.40 फीसदी अंक लाकर इस बार यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रदेश में आठवां और कानपुर में पांचवां स्थान हासिल कर परिवार और कॉलेज का नाम रोशन कर दिया है। उन्हें हिंदी, अंग्रेजी और गणित में 96 एवं फिजिक्स और केमेस्टी्र में 97 अंक मिले हैं। पिता विनीत का सपना है कि उनका छोटा बेटा हर्षित इंजीनियर बने। इसे पूरा करने के लिए हर्षित आईआईटी कानपुर से बीटेक करना चाहते है। इंजीनियर प्रवेश परीक्षा की तैयारी उन्होंने शुरू कर दी है।

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