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UP Board Result 2022: यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं के टॉपर्स से मिलिए, जानिए उनकी सफलता की कहानी

Sat, 18 Jun 2022 03:53 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं परिणाम जारी हो गया। इसमें कड़ी मेहनत करने वाले छात्रों ने टॉप रैंक्स हासिल की हैं।
 
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टॉपर किरन कुशवाहा, साथ में मां रूमा देवी व चाचा अनिल कुशवाहा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं का परिणाम जारी हो गया है। इसमें कानपुर के प्रिंस पटेल 97.67 प्रतिशत अंकों के साथ टॉपर बने हैं। बता दें कि घोषित परिणामों के अनुसार बालकों का उत्तीर्ण प्रतिशत 85.25 और बालिकाओं का प्रतिशत 91.69, प्रतिशत है। बालकों का उत्तीर्ण प्रतिशत 85.25 और बालिकाओं का प्रतिशत 91.69 प्रतिशत है। 

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यूपी के बोर्ड के कक्षा 10 के परिणामों के कानपुर शहर का जलवा कायम रहा है। इस बार टॉप 10 में सात रैंक्स पर कानपुर के छात्र काबिज हैं। इनमें दूसरा स्थान पर किरन कुशवाहा (97.50), चौथा स्थान पलक अवस्थी (97.12), पांचवां स्थान नैनसी वर्मा (97.00), पांचवां स्थान प्रांशी द्विवेदी (97.00), आठवां स्थान राज यादव (96.33) और नौंवा स्थान शिवा (96.17) शामिल हैं। आइए जानते हैं, इन  टॉपर्स की सफलता की कहानी। 

सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
पिकअप चालक की बेटी किरन कुशवाहा बनी टॉपर
हाईस्कूल का परिणाम घोषित होने के बाद शहर के शिवाजी इंटर कॉलेज अर्रा में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। ढोल बाजे के साथ शिक्षक और छात्र छात्राएं झूम कर नाचे। नौबस्ता कानपुर निवासी किरन कुशवाहा ने 97.50 प्रतिशत अंक हासिल कर शहर की टॉपर बनी। पिता संजय कुशवाहा पिकअप चलाते हैं। मां रूमा देवी ग्रहणी है। परिवार में पांच बहनों में किरण सबसे छोटी है। किरण ने कहा कि मेरी ईस उपलब्धि का श्रेय मेरे पिता व चाचा अनिल कुशवाहा को जाता है। क्योंकि जब कभी फीस जमा करने के पैसे नहीं हुए तो चाचा ने पूरी मदद की। उनकी वजह से इतना हौसला बड़ा। वहीं, दूसरा श्रेय स्कूल के शिक्षकों को दिया। किरन ने कहा कि यदि आप पूरा फोकस अपनी पढ़ाई पर रखते हैं तो सफलता जरूर मिलेगी। अब आगे चलकर आईएएस अफसर बनना है। किरन के चाचा अनिल कुमार सब्जी विक्रेता हैं। उन्होंने कहा कि बेटियों की पढ़ाई ना रुके यही हमारा लक्ष्य।

टॉपर पलक अवस्थी - फोटो : अमर उजाला
हार्ड वर्क के साथ-साथ स्मार्ट वर्क करना है जरूरी
शिवाजी इंटर कॉलेज अर्रा की पलक अवस्थी ने 97.17 प्रतिशत अंक हासिल कर शहर में दूसरा स्थान प्राप्त किया है।  पलक के पिता राजकुमार अवस्थी फर्नीचर कारोबारी हैं और मां पिंकी अवस्थी ग्रहणी है। परिवार में एक बड़ी बहन दीक्षा अवस्थी है। नौबस्ता नारायण पुरी निवासी पलक अवस्थी ने कहा कि आज के समय को देखते हुए हार्ड वर्कर के साथ-साथ स्मार्ट वर्क करना भी बहुत जरूरी है। समय के हिसाब से खुद को अपडेट करते रहें तभी सफलता मिलेगी। पलक ने कहा कि आगे चलकर इंजीनियर बनना है, जिसके लिए अभी से ही तैयारी करनी शुरू कर दी है। पलक ने कहा कि सेल्फ स्टडी पर ज्यादा भरोसा रखना चाहिए। दिन में चार से पांच घंटे मैंने सेल्फ स्टडी की है और इसके अलावा पिछले कोर्स को रोजाना पढ़ना चाहिए। इससे आप को भूलने वाली समस्या नहीं रहेगी। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय स्कूल के शिक्षकों को दिया।

टॉपर नैंसी वर्मा - फोटो : अमर उजाला
बिना कोचिंग के करी पढ़ाई, प्रदेश में पाया नवां स्थान
बिना कोचिंग कर शहर की नैंसी वर्मा ने हाई स्कूल में 97 अंक प्राप्त कर प्रदेश में नवां और शहर में तीसरा स्थान हासिल कर स्कूल का गौरव बढ़ाया है। जरौली फेस टू निवासी सुनील वर्मा ऑटो चालक है। पत्नी मंजू वर्मा ग्रहणी है। परिवार में बेटा सत्यम, बेटी सान्या, नैंसी व सृष्टि। नैंसी शिवाजी इंटर कॉलेज अर्रा में हाई स्कूल की पढ़ाई कर रही है। नैंसी  ने कहा कि खुद पर भरोसा करें और अपनी पढ़ाई पर फोकस करें, तो सफलता जरूर हाथ लगेगी। सफलता का कोई शॉर्टकट तरीका नहीं है। मेहनत ही आपको अपनी मंजिल तक पहुंचा सकती है। नैंसी ने कहा कि आगे चलकर आईपीएस अधिकारी बन कर लोगों की सेवा करना है। नैंसी ने कहां की जितनी उम्मीद थी उतने नंबर मिले हैं। अन्य युवाओं के लिए कहा कि पढ़ाई के लिए जब तक आप टाइम टेबल निर्धारित नहीं करेंगे, तब तक पढ़ाई ठीक से नहीं हो सकती।
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टॉपर प्रांशी द्विवेदी - फोटो : अमर उजाला
पढ़ाई के लिए छोड़ा गांव का घर, शहर के टॉपरों में शामिल हुई प्रांशी
शिवाजी इंटर कॉलेज अर्रा की छात्रा प्रांशी द्विवेदी ने 97 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश में दसवां स्थान प्राप्त किया तो वहीं शहर में चौथा स्थान पाया है। प्रांशी ने बताया कि हम भाई बहनों की पढ़ाई के लिए पिता ने गांव वाला घर छोड़कर शहर में किराए का एक कमरा लिया। आज इस उपलब्धि का श्रेय मेरे पिता को ही जाता है। मूल रूप से हमीरपुर के बाधुरखुर्द निवासी चंद्र प्रभाकर द्विवेदी प्राइवेट शिक्षक है। पत्नी ममता द्विवेदी ग्रहणी है। छोटा बेटा अभिनंदन कक्षा एक का छात्र है। प्रांशी ने बताया कि दस से 12 घंटे बिना कोचिंग के पढ़ाई की है, जिस कारण इतने अच्छे अंक आए हैं। पिता ने हम लोगों की पढ़ाई के लिए बहुत संघर्ष किया है। उनके इस संघर्ष को अब सफल बनाने की बारी आई है। आगे चलकर आईएएस अफसर बनकर उनके सपनों को साकार करना है। परिणाम आने के बाद मां ममता द्विवेदी के आंखों में खुशी के आंसू देखने को मिले। ममता ने कहा कि किताबों के लिए जब पैसे नहीं हुए] तो स्कूल के शिक्षकों ने किताबों की व्यवस्था की। देर सवेर फीस जमा की उस पर भी शिक्षकों ने कभी आपत्ति नहीं जताई। उसी का कारण है कि आज बेटी ने टॉप किया है।
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