कानपुर के रमईपुर में मेगा लेदर क्लस्टर बनने की मंजूरी मिलने से शहर के चमड़ा कारोबार को नई ऊंचाई मिल सकेगी। यहां पर करीब छह हजार करोड़ का निवेश आएगा। इसके अलावा प्रत्यक्ष तौर पर 50 हजार लोगों को और अप्रत्यक्ष तौर पर डेढ़ लाख समेत दो लाख लोगों को रोजगार मिलेगा।
क्लस्टर में जूते, सैडलरी के अलावा अन्य चमड़ा उत्पादों की फ्लैटेड इकाइयों समेत 175 टेनरियों की स्थापना की जाएगी। करीब आठ साल पुराने इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने से शहर के चमड़ा कारोबारियों ने खुशी जताई है उनका कहना है कि इससे इस उद्योग में स्थायित्व आएगा। प्रदूषण की समस्या खत्म होगी।
टेनरियों पर बंदी जैसी समस्या का समाधान हो जाएगा। शहर का चमड़ा उत्पाद इन दिनों संकट के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में यह क्लस्टर किसी संजीवनी से कम नहीं है। चर्म निर्यात परिषद के पूर्व चेयरमैन आरके जालान ने बताया कि 235 एकड़ वाले प्रोजेक्ट में 55 एकड़ में टेनरियों की स्थापना की जाएगी। 30 फीसदी ग्रीन बेल्ट होगी।
यहीं पर 20 एमएलडी क्षमता वाली ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। इसके अलावा प्रदर्शनी स्थल, कॉमन फैसिलिटी सेंटर जैसी सुविधाएं यहां पर मिलेंगी। उनके मुताबिक यहां पर सालाना 13 हजार करोड़ का उत्पादन हो सकेगा। जल्द ही इसका निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। मार्च 2022 तक इसका निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।
21 को होगी पहली बैठक
मेगा लेदर क्लस्टर के क्रियान्वयन के लिए छह सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। इसकी पहली बैठक 21 दिसंबर को होगी। कमेटी में कमिश्नर, जिलाधिकारी, जेडी इंडस्ट्रीज, एसपीवी प्रभारी, यूपीएसआईडीए के नोडल अधिकारी, एडीएम एलए कानपुर नगर शामिल हैं।
क्लस्टर बनने से हर साल होने वाली टेनरी बंदी की परेशानी खत्म होगी। एक ही जगह पर इकाइयों के लगने से उत्पादों की गुणवत्ता और बेहतर होगी। -जावेद इकबाल, चमड़ा कारोबारी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर दो लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। कारोबार नई ऊंचाइयों पर जाएगा। 2012 से इस प्रोजेक्ट को लगाने का काम चल रहा था। अब इसे मंजूरी मिली है।
अशरफ रिजवान, एसपीवी निदेशक