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बिना जरूरत एंटी बायोटिक का इस्तेमाल नया खतरा : डॉ. संकल्प

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कानपुर। एंटीबायोटिक दवाओं का बिना जरूरत प्रयोग विश्वस्तर पर गंभीर खतरा बनता जा रहा है। रोगियों की हालत जल्दी गंभीर होती है और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के कारण दवाओं का असर नहीं हो पाता। इस स्थिति को रोकने के लिए डॉक्टरों के स्तर पर एंटीबायोटिक लिखने की संख्या सीमित कर दी गई है। यह जानकारी जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में आयोजित पुनर्मिलन समारोह में आस्ट्रेलिया से शिरकत करने आए पुरातन छात्र डॉ. संकल्प पुरवार ने बताई।
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डॉ. पुरवार कॉलेज के वर्ष 2000 एमबीबीएस बैच के पुरातन छात्र हैं और आस्ट्रेलिया में इंटेंसिविस्ट हैं। उन्होंने बताया कि जुकाम, बुखार, खांसी, डायरिया आदि सामान्य रोगों में एंटी बायोटिक खाते रहते हैं जबकि इसमें इसकी जरूरत नहीं होती। इसके अलावा लोग खुद से या मेडिकल स्टोर से एंटी बायोटिक लेकर खाते रहते हैं। इससे रेजिस्टेंस पैदा हो जाता है।

निमोनिया और दूसरे गंभीर रोग होते हैं जिनमें एंटी बायोटिक की जरूरत होती, तब रेजिस्टेंस की वजह से दवा काम नहीं करती है। ऐसे में रोगी की मौत हो जाती है या वह मल्टी ऑर्गन फेल्योर में चला जाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए प्रोटोकॉल बनाया गया है। इसमें तय कर दिया गया है कि जनरल प्रैक्टिशनर गिनती की किन सामान्य किस्म की एंटी बायोटिक लिख सकता है।
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अगर रोगी को जरूरत है तो संक्रमण की जांच के बाद उसे विशेषज्ञ के पास भेजा जाता है, वह अन्य एंटी बायोटिक लिखता है। उन्होंने बताया कि आईसीयू में एक्मो तकनीक का इस्तेमाल होने लगा है। जब वेंटिलेटर बेअसर हो जाता है और रोगी के हृदय और फेफड़े काम नहीं करते तो यह विधि अपनाई जाती है। इससे रोगी के शरीर को रिकवरी का समय मिल जाता है।


एसजीपीजीआई में डायबिटीज का अलग अस्पताल
समारोह में आए एसजीपीजीआई के इंडो क्रोनोलॉजिस्ट डॉ. शिवेंद्र वर्मा ने बताया कि संस्थान में डायबिटीज के इलाज के लिए अलग अस्पताल खुल गया है। इसका नाम एडवांस्ड डायबिटीज सेंटर है। डायबिटिक न्यूरोपैथी, गुर्दा रोग, रेटिनोपैथी आदि रोगों का इलाज एक छत के नीचे मिल जाएगा। इसके साथ ही रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं की अस्थियों की सेहत जानने के लिए शोध शुरू किया गया है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित चिप पैरों में लगाई जाती है। इसके नैनो सेंसर से अस्थियों की स्थिति पता चलती रहती है। इसके साथ ही 40 वर्ष से कम आयु वाले डायबिटीज के रोगियों में कार्डियो-वैस्कुलर रिस्क के बारे में पता कर रहे हैं।
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