गंगा बैराज पर तैनात पुलिस बल
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चंद्रशेखर ने कहा - उन्नाव कांड में जो तीसरी किशोरी 17 फरवरी की रात से मौत से जंग लड़ रही है, मैं उससे मिलने आया हूं। हम शुरुआत से ही मांग कर रहे हैं कि पीड़िता को एम्स भेज दिया जाए। यहां उसे प्राइवेट अस्पताल में रखा गया है, जबकि सरकार और पुलिस सरकारी अस्पताल का मेडिकल मानती है। इसलिए मैं इतने दिनों तक इंतजार करने के बाद आया कि अपनी बहन से मिल लूं और पीड़ित परिवार से मिलकर उनकी तकलीफें जान सकूं। मैंने यहां के डीएम से बात की तो उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार ने हमसे कहा ही नहीं कि एम्स भेज दो।
चंद्रशेखर ने कहा, मैं ये जानना चाहता हूं कि अगर बच्ची की सुरक्षा को लेकर प्रशासन सक्रिय है तो क्या वह पीड़ित परिवार की रजामंदी का इंतजार करेगा? क्या पीड़ित परिवार की रजामंदी के बाद उसे निजी हॉस्पिटल लाया गया था। पुलिस के रोकने का विरोध करते हुए कहा, जितनी पुलिस मुझे रोकने के लिए लगा रखी है इतनी अगर अपराधियों को रोकने के लिए लगाई जाए तो शायद अपराध खत्म हो जाएं।
बता दें कि उन्नाव कांड में मौत से संघर्ष कर रही तीसरी किशोरी की हालत में डॉक्टरोें को सुधार दिखा है। रविवार को उसने खाना पीना भी शुरू कर दिया था। पुलिस को उम्मीद है कि सोमवार को किशोरी के मजिस्ट्रेटी बयान दर्ज किए जा सकेंगे। किशोरी शहर के प्राइवेट अस्पताल में भर्ती है। अब किशोरी का वेंटीलेटर सपोर्ट हटाया गया है। मजिस्ट्रेट के सामने किशोरी के बयान दर्ज किए जा सकते हैं, जिससे असोहा कांड के कई राज खुल सकेंगे।