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पैदा होते ही हुए जुदा: अल्ट्रासाउंड में दो थे, अस्पताल में हुआ सीजर तो एक लापता, मां बोली- मैंने दो आवाज सुनीं

Fri, 01 Sep 2023 12:12 PM IST
हिमांशु अवस्थी प्रशांत द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: प्रसूता सोनी ने बताया कि डॉक्टरों ने उनकी आंख पर रुई रखी थी। एनेस्थीसिया के कारण वह बेहोशी की हालत में थीं, लेकिन उन्होंने दो बच्चों के रोने की आवाज सुनी थी। 
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पीड़ित मां की कहानी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर में कल्याणपुर के एक निजी अस्पताल में फतेहपुर के दंपती के साथ ऐसा खेल हुआ कि वे भौंचक्के रहे गए। दरअसल, युवक की पत्नी जुड़वां बच्चों को जन्म देने वाली थी। अस्पताल के डॉक्टरों ने ऑपरेशन के बाद एक ही बच्चा पैदा होने की जानकारी दी, तो अचंभे में पड़ गए। पीड़ित ने मौके पर पुलिस बुलाई और अस्पताल प्रबंधन पर एक बच्चा गायब करने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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अब परिजनों ने कोर्ट की शरण ली है। फतेहपुर के कलिलनगर निवासी अनुराग सचान प्राइवेट नौकरी के साथ किसानी भी करते हैं। उनकी पहले से दो बेटियां अनन्या (10) व काव्या (6) हैं। पत्नी सोनी सचान (32) फिर से गर्भवती हुई। आठ माह पूरे होने पर सोनी की अच्छी देखरेख के लिए अनुराग ने उन्हें सितंबर के आखिर में कानपुर देहात के अकबरपुर में रहने वालीं उनकी मौसी मंजू के घर भेज दिया।

जुड़वां बच्चे थे और उनका अलग-अलग वजन
26 जुलाई को अचानक सोनी को पेट में दर्द उठा, तो परिजन उन्हें अकबरपुर के एक बड़े अस्पताल में ले गए। अनुराग के अनुसार वहां डॉक्टरों ने सोनी का अल्ट्रासाउंड किया, तो जुड़वां बच्चों के होने की जानकारी दी। सोनी को स्क्रीन पर शिशुओं की हरकतें भी दिखाई गईं। अस्पताल ने जो रिपोर्ट दी, उसमें भी जुड़वा बच्चों और उनका अलग-अलग वजन, अलग-अलग पल्स का भी जिक्र है। यह भी बताया गया कि दोनों बच्चे करीब 35 सप्ताह के हैं।

प्रसव से पहले अस्पताल वालों ने भी कहा था बच्चे जुड़वां
अनुराग के अनुसार सोनी की एक रिश्तेदार कल्याणपुर के आवास विकास एक स्थित निजी अस्पताल में नर्स है। पत्नी के प्रसव के संबंध में उनसे संपर्क किया। दो अगस्त को उन्हीं के जरिये अस्पताल में भर्ती कराया। अनुराग ने बताया कि डॉक्टरों ने भी अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट देखने के साथ ही हाथ से जांच करने के बाद जुड़वां बच्चों का दावा किया था।

पीड़ित परिवार ने कोर्ट में की है अपील
ऑपरेशन के बाद एक ही बच्चा सौंपा गया। जब उन्होंने दूसरे बच्चे के विषय में पूछा तो आनाकानी शुरू कर दी गई। उन्होंने इमरजेंसी नंबर 112 पर कॉल करके पुलिस को मौके पर बुलाया। पुलिस ने काफी देर तक डॉक्टरों और परिजनों से बात की, लेकिन उन्हें खुद भी कुछ समय नहीं आया तो लौट गए। अनुराग के अनुसार उन्होंने अकबरपुर और कल्याणपुर स्थित दोनों अस्पतालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए कोर्ट में अपील की है।

मुझे दो बच्चों के रोने की आवाज सुनाई दी, फिर बेहोश कर दिया
प्रसूता सोनी ने बताया कि डॉक्टरों ने उनकी आंख पर रुई रखी थी। एनेस्थीसिया के कारण वह बेहोशी की हालत में थी, लेकिन उन्होंने दो बच्चों के रोने की आवाज सुनी थी। उन्होंने आंख से रुई हटाने की कोशिश की। आरोप है कि तभी किसी ने कहा देखो होश आ रहा है और फिर किसी ने एक इंजेक्शन और लगाया, जिससे वह पूरी तरह से बेहोश हो गई। जब होश आया तो गोद में एक बेटी दी गई।

रिश्तेदार से लेकर डॉक्टर की हरकतें तक संदिग्ध
अनुराग के अनुसार जब एक बच्चे जन्म लेने की जानकारी उन्हें दी गई तो उन्होंने अस्पताल में हंगामा करते हुए मुख्य डॉक्टर से बात कराने के लिए कहा, जिन्होंने पहले जुड़वां बच्चों के होने का दावा किया था। इस पर स्टाफ ने उनसे बात नहीं कराई। आरोप है कि जब अनुराग ने अस्पताल में पुलिस बुलवाने के लिए कहा तो रिश्तेदार नर्स भी अस्पताल की इज्जत जाने का हवाला देकर रोने का दिखावा करने लगीं।

किसी एक अस्पताल में खेल किए जाने की आशंका
अनुराग के अनुसार एक अस्पताल में जुड़वां बच्चों के होने का दावा किया गया। अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि है। वहीं, दूसरे अस्पताल में पहले जुड़वां बच्चों की बात बोली गई फिर एक ही बच्चा दिया गया। उन्होंने बताया कि किसी एक अस्पताल में खेल किए जाने की आशंका है, जिसकी जांच पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करके करनी चाहिए थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें टरका दिया।

मोबाइल से बनाया गया वीडियो दिखाया
अब उन्होंने कोर्ट की शरण ली है।  वहीं, अनुराग का मानना है कि अस्पतालों में स्टॉफ खुद बच्चों को चोरी करके बेच देता है। अनुराग के अनुसार उनके हंगामा करने पर अस्पताल प्रबंधन ने एक वीडियो दिखाया, जो मोबाइल से बनाया गया था। उसमें आपरेशन के बाद का दृश्य दिखाया गया है और सिर्फ एक बच्ची नजर आ रही है। उनका आरोप है कि प्रबंधन ने जानबूझकर बचने के लिए वीडियो बनाया था।
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पीड़ित की तहरीर मिलने पर अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट की विशेषज्ञों से जांच करा ली जाएगी। आरोप सही पाए गए तो आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्जकर कार्रवाई की जाएगी। -लाखन यादव, एडीसीपी वेस्ट
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