कानपुर देहात। जैनपुर (राजपुर) उपकेंद्र से जुड़े अफसरिया, भाल व गौरीकरन समेत 15 गांवों की बिजली आपूर्ति जर्जर तारों के भरोसे है। दो बार बिजली लाइनों के सुदृढ़ीकरण का प्रस्ताव भेजा गया लेकिन मंजूरी नहीं मिलने से जर्जर तार बदल नहीं सके। आए दिन फॉल्ट व तार टूटने से घंटों बिजली गुल रहती है।
गौरीकरन गांव में वर्ष 1980 में विद्युतीकरण हुआ। इसके बाद से यहां तार नहीं बदले गए हैं। जर्जर तारों को जोड़ जुगाड़ कर बिजली आपूर्ति हो रही है। जरा सी हवा चलने या फिर लोड बढ़ने पर तार टूटते हैं। घंटों बिजली गुल रहती है। वहीं, भाल व अफसरिया में भी जर्जर तारों की वजह से शेड्यूल की बिजली आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। देवब्रह्मापुर व गौरी समेत अन्य गांव का भी कमोवेश यही हाल है। वर्ष 2020 में इन गांवों के जर्जर तार बदलने के लिए जेई ने प्रस्ताव भेजा था। इसकी मंजूरी नहीं मिल सकी।
इधर वर्ष 2025-26 में तत्कालीन जेई प्रवीण कुमार ने बिजनेस प्लान में करीब 45 लाख से इन गांवों के जर्जर तार बदलने का प्रस्ताव भेजा था। हालांकि मंजूरी नहीं मिलने से जर्जर तार नहीं बदल सके है। भीषण गर्मी में आए दिन तार टूटते हैं। रास्ते पर तार टूटकर गिरने से हादसे का खतरा भी बना रहता है। गौरीकरन निवासी जिला पंचायत सदस्य अनुराग दिवाकर ने बताया कि जर्जर तार बदलने के लिए अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। जगह-जगह जर्जर तारों को जोड़कर किसी तरह से बिजली आपूर्ति की जा रही है। एसडीओ सिकंदरा अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि उनके चार्ज लेने से पूर्व के प्रस्ताव होंगे। अभी किसी काम से बाहर है। जानकारी कराकर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
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लोगों ने बयां किया दर्द
फोटो-10 भूरा।
आए दिन टूटकर गिरते तार
अफसरिया में जर्जर तारों से बिजली आपूर्ति हो रही है। जरा सी हवा चलने पर फॉल्ट होते हैं। फॉल्ट से घंटों बिजली गुल रहती है। - भूरा।
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फोटो-11 नईम।
कोई नहीं सुनता
बिजली का बिल जमा करने के बाद भी तारों को बदलवाने के प्रति निगम के अधिकारी संजीदा नहीं है। तार टूटकर गिरने से हादसे का खतरा है। डर के बीच लोग रह रहे हैं। - नईम।