कानपुर। अधिवक्ता राजाराम वर्मा हत्याकांड की अग्रिम विवेचना जारी है। शनिवार को बार एसोसिएशन के पूर्व पदाधिकारी और एनआरआई सिटी के दो निदेशकों से पूछताछ के बाद शनिवार को दो और अधिवक्ताओं से नौ घंटे पूछताछ की गई। दोनों अधिवक्ताओं मनोज सक्सेना और जितेंद्र कुमार सिंह ने मृतक की छोटी बहू से करीब आठ साल पहले जमीन का एग्रीमेंट कराया था। हालांकि, उन्हें भी देर रात 12 बजे छोड़ दिया गया था।
क्यू ब्लॉक शारदानगर निवासी मनोज सक्सेना और नवाबगंज के सुक्खीपुरवा नई बस्ती निवासी जितेंद्र कुमार सिंह अधिवक्ता हैं। अधिवक्ता राजाराम वर्मा के छोटे बेटे शिवाजी की 23 सितंबर 2016 को बीमारी से मौत हो गई थी। उनकी मौत के दो साल बाद उनकी पत्नी रेखा वर्मा ने 26 दिसंबर 2018 को तीन आराजी की कुल 2.12 हेक्टेयर जमीन अधिवक्ता मनोज सक्सेना और जितेंद्र कुमार सिंह को एग्रीमेंट की थी। इस एग्रीमेंट में आराजी संख्या 2561 (ख), 2559 (क) और 2171(क) शामिल थी। राजाराम हत्याकांड से पहले इस एग्रीमेंट ने परिवार में तनाव बढ़ा दिया था। बाद में बैंक कर्मी रेखा का तबादला पहले औरैया फिर पटना और बाद में मुंबई की शाखा में हो गया था।
नवाबगंज थाना प्रभारी केशव तिवारी ने बताया कि दोनों अधिवक्ताओं को दोपहर करीब तीन बजे पूछताछ के लिए थाने लाया गया था। उनसे घटनाक्रम से जुड़े कई सवाल किए गए। उन्हें रात करीब 12 बजे जाने दिया गया। उन्हें बताया गया है कि जरूरत पड़ने पर दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।