इस पर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। साथ ही शासन को भी रिपोर्ट भेजी थी। डॉ. काला ने दोनों के निलंबन की पुष्टि की है। उनका कहना है कि कोई भी डॉक्टर मेडिकल कॉलेज या हैलट परिसर में प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकते, लेकिन बाहर जाकर कौन क्या करता है? इसका पता वे कैसे रख सकते हैं? इस संबंध में सबको आगाह भी किया जाता है। शासन प्राइवेट प्रैक्टिस न करने के लिए भत्ता भी देता है। वहीं, डॉ. राघवेंद्र गुप्ता का कहना है कि अभी इस संबंध में उन्हें कोई आदेश नहीं मिला है।