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जीएसवीएम: प्राइवेट प्रैक्टिस करने के लिए दो चिकित्सा शिक्षक निलंबित, आयकर छापे में भी आ चुके हैं नाम

Tue, 19 Apr 2022 10:52 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जन डॉ. राघवेंद्र गुप्ता और उनकी पत्नी डॉ. स्वप्निल पर कार्रवाई हुई है। इससे पहले भी आयकर छापे के दौरान दोनों के नाम सामने आए थे। इस मामले में शासन ने प्राचार्य से भी स्पष्टीकरण मांगा है।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कानपुर में सरकारी डॉक्टर होने के बाद भी प्राइवेट प्रैक्टिस करने के मामले में शासन ने मंगलवार को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जन डॉ. राघवेंद्र गुप्ता और उनकी पत्नी पैथोलॉजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. स्वप्निल गुप्ता को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला से डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस के मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। आयकर छापे में पता चला था कि डॉ. गुप्ता निजी अस्पताल में प्रैक्टिस करते हैं और उनकी पत्नी की हैलट के सामने पैथोलॉजी है।

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आयकर विभाग ने चार मार्च को काकादेव डबल पुलिया स्थित न्यूरॉन हॉस्पिटल और हैलट के सामने यूनीक पैथोलॉजी पर कार्रवाई की थी। छापे में एक करोड़ 30 लाख कैश मिला था। न्यूरॉन हॉस्पिटल से न्यूरो सर्जन डॉ. राघवेंद्र गुप्ता और पैथोलॉजी से उनकी पत्नी डॉ. स्वप्निल गुप्ता का जुड़ाव पाया गया। सरकारी डॉक्टर होने के बाद भी वे प्राइवेट प्रैक्टिस करते थे। बताया गया कि मेडिकल कॉलेज में स्थायी नियुक्ति के पहले डॉ. स्वप्निल यह पैथोलॉजी संचालित करती थीं। नौकरी के बाद भी उन्होंने पैथोलॉजी नहीं छोड़ी।

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इस पर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। साथ ही शासन को भी रिपोर्ट भेजी थी। डॉ. काला ने दोनों के निलंबन की पुष्टि की है। उनका कहना है कि कोई भी डॉक्टर मेडिकल कॉलेज या हैलट परिसर में प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकते, लेकिन बाहर जाकर कौन क्या करता है? इसका पता वे कैसे रख सकते हैं? इस संबंध में सबको आगाह भी किया जाता है। शासन प्राइवेट प्रैक्टिस न करने के लिए भत्ता भी देता है। वहीं, डॉ. राघवेंद्र गुप्ता का कहना है कि अभी इस संबंध में उन्हें कोई आदेश नहीं मिला है।
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