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Kanpur News: जल निगम शहरी-ग्रामीण में खींचतान, गंगा में तीसरे दिन भी बहाया गंदा पानी

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जाजमऊ में ईएसपीएस के कर नाले से गंगा में गिरता गंदा पानी. - फोटो : स्रोत : स्थानीय लोग
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कानपुर। जाजमऊ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बंद होने के कारण लगातार तीसरे दिन शुक्रवार को भी गंदा पानी चोर नाले से गंगा में जाता रहा। तीन दिन में करीब 10 करोड़ लीटर गंदा पानी गंगा में जाने की आशंका है। अमर उजाला में मामला उजागर होने पर शुक्रवार रात जलकल विभाग के महाप्रबंधक और जल निगम के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से प्लांट का निरीक्षण किया। इस दौरान भी प्लांट को क्षमता के अनुरूप संचालित न कर गंगा में गंदा पानी बहाने का पता चला। मामले में जल निगम शहरी और ग्रामीण के अधिकारी एक-दूसरे के पाले में गेंद डाल रहे हैं।
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दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अजीत कुमार सुमन ने 24 घंटे पहले प्लांट का खुद औचक निरीक्षण करने के बाद शुक्रवार को बोर्ड के सहायक अभियंता प्रवेश कुमार को भेजकर जांच कराई। क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि भुगतान न होने के कारण ठेकेदार कंपनी केआरएमपीएल प्लांट का संचालन ठीक से नहीं कर रही है, जिसकी वजह से गंदा पानी गंगा में जा रहा है। रिपोर्ट तैयार कर शासन से लेकर क्षेत्रीय कार्यालय भेजी है। जल निगम को नोटिस भी दिया है।
जाजमऊ एसटीपी में 2000 लाख लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) की क्षमता का कॉमन सीवेज पंपिंग स्टेशन (सीएसपीएस) और 130, 43 व 36 एमएलडी के तीन जल शोधन संयंत्र हैं। इनमें से 36 एमएलडी के संयंत्र में टेनरियों का जहरीला पानी भी आता था, जिसका संचालन जल निगम (शहरी) गंगा इंफ्राबिल्ट कंपनी से कराता था। 40 करोड़ से ज्यादा की लागत से 20 एमएलडी क्षमता का कॉमन क्रोम एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीसीईटीपी) बनने के बाद टेनरी वेस्ट को प्लांट की तरफ मोड़ दिया गया। दूसरी तरफ ठेकेदार कंपनी ने भुगतान न होने का हवाला देकर 36 एमएलडी प्लांट बंद कर दिया। गत सप्ताह कमिश्नर की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस प्लांट का सीवेज अन्य दोनों प्लांटों में भेजने के निर्देश दिए गए। इन दोनों प्लांटों का संचालन और रखरखाव केआरएमपीएल कंपनी करती है। यह कंपनी 173 एमएलडी के दोनों प्लांटों में मात्र 105-152 एमएलडी सीवेज ही शोधित कर रही है। शेष गंदा पानी ओवरफ्लो होकर गंगा में जा रहा है।
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कोट

जाजमऊ एसटीपी का 36 एमएलडी प्लांट पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बंद कराकर सीवेज को दोनों अन्य पंपों में डायवर्ट किया जा रहा है। सभी एसटीपी, पंपिंग स्टेशनों में 28 सीसीटीवी कैमरे लगाकर निगरानी की जा रही है। यदि इस प्लांट से गंगा में गंदा पानी जा रहा है तो इसकी जांच कराऊंगा।
-सुधीर कुमार, नगर आयुक्त

जांच में पता चला कि सुबह लाइट न होने और दो ही पंप चलने के कारण गंदा पानी गंगा में गया था। हालांकि रात आठ से साढ़े आठ बजे जल निगम शहरी के अभियंताओं के साथ निरीक्षण के दौरान गंदा पानी गंगा में नहीं जाता मिला। ठेकेदार कंपनी बिजली जाने पर जनरेटर देर में चलाती है, जिसकी वजह से गंदा पानी ओवरफ्लो होता है। पीक आवर्स में प्लांट के चार पंप चलने चाहिए, जबकि दो ही चलाते हैं।

- एके त्रिपाठी, महाप्रबंधक, जलकल विभाग

गंगा इंफ्राबिल्ट कंपनी ने करीब 12 करोड़ रुपये बकाया होने की वजह से 36 एमएलडी प्लांट का संचालन बंद कर दिया है। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में तय हुआ था कि जल निगम (ग्रामीण) इस प्लांट का पानी अन्य दोनों प्लांटों में ले जाकर शोधित करेगा, पर वे प्लांट पूरी क्षमता से नहीं चल रहे हैं।
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- विशाल सिंह, अधिशासी अभियंता, जल निगम (शहरी)

जल निगम (शहरी) ने 36 एमएलडी प्लांट हस्तांतरित नहीं किया है। उसी से ओवरफ्लो होकर गंदा पानी गंगा में गया था।
- मोहित चक, अधिशासी अभियंता, जल निगम (ग्रामीण)
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