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खून से सनी सड़क पर बिखरे पड़े जूते-चप्पल किसी के भी दिल को दहलाने के लिए काफी थे...

Sat, 02 Feb 2019 03:13 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
यूपी के उरई (जालौन) जिले में सुबह के वक्त हाईवे पर हुए हादसे ने हर शख्स का कलेजा कंपा दिया। जिसने भी खून से लाल सड़क पर पड़े घायलों को तड़पते देखा और शवों से लिपटकर परिजनों की चीखें सुनी उसके रोंगटे खड़े हो गए। सुबह के वक्त हुए हादसे के कारण दोपहर तक हाईवे से लेकर अस्पताल तक चीख पुकार ही सुनाई दे रही थी। डॉक्टरों की टीम घायलों की हर संभव मदद के लिए प्रयासरत नजर आ रही थी, लेकिन उनकी नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें सिवाए रेफर करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था।
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सुबह आठ बजे के बाद जो भी उरई स्थित झांसी-कानपुर हाईवे की ओर से गुजरा वह एक पल के लिए घटनास्थल पर रुके बगैर नहीं रह सका। बोलेरो और सड़क पर पलटे हुए ट्रक को देखकर हर किसी ने हादसे की भयावहता का अंदाजा लगा लिया था।
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उरई हाईवे - फोटो : अमर उजाला
खून से सनी सड़क पर बिखरे पड़े जूते चप्पल हर किसी के दिल को दहलाने के लिए काफी थे। अस्पताल में शवों के परिजनों की चीखें आसपास के मरीजों और उनके तीमारदारों को विचलित कर रही थीं। शहर के लोगों की भी भीड़ घायलों को देखने के लिए अस्पताल पहुंच गई थी।  

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उरई हाईवे - फोटो : अमर उजाला
हाईवे से गुजरने वालों की मानें तो उरई मोड़ के पास करीब 200 मीटर तक हाईवे पर डिवाइडर न होना भी अक्सर हादसों का कारण साबित होता है। अक्सर वाहन इस कारण आमने सामने आ जाते हैं। ऐसे में यदि रफ्तार तेज हुई तो चालक के लिए वाहनों को संभालना मुश्किल हो जाता है। शुक्रवार के हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। जिसकी वजह से इतना दर्दनाक हादसा हो गया।  
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उरई हाईवे - फोटो : अमर उजाला
सड़क दुर्घटना में जान गवाने वाले कक्षा 8 के छात्र कोमल निवासी सधारा के पिता रामसुमरन मजदूरी करके अपने पुत्रों को शहर में पढ़ा रहे थे। उनका सपना था कि पढ़कर कोमल कुछ बनकर उनकी गरीबी दूर करेगा। मन में यही सपना लिए वह अपने बेटे विवेक व कोमल को पढ़ा रहे थे। क्या पता था कि उनका यह सपना अधूरा रह जाएगा।
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डेमो पिक - फोटो : अमर उजाला
मेहनत मजदूरी करके उनका तो जीवन गुजर गया। लेकिन वह पुत्र को पढ़ा लिखाकर इस अभिशाप से बाहर निकालना चाहते थे। पुत्र की मौत से वह पूरी तरह से टूट गए। वहीं उनका दूसरा पुत्र विवेक भी गंभीर रूप से घायल है। उनका कहना है कि एक हादसे ने उनके जीवन का सपना चूर-चूर कर दिया। हादसे के बाद से रामसुमरन गुमशुम हैं। उनके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं।
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