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Kanpur News: छप्पर के नीचे इलाज, कील में ड्रिप के साथ लटकी व्यवस्था

Fri, 02 Oct 2026 12:57 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। जनपद में झोलाछाप आमजन की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। इधर, स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई के नाम पर क्लीनिक संचालक को सिर्फ नोटिस थमा दे रहा है। कार्रवाई के डर से झोलाछाप क्लीनिक बंद करके अगल-बगल की दुकानों में मरीजों का इलाज कर रहे हैं। बुधवार को डेरापुर में चश्मे की दुकान में मरीज का उपचार होते मिला था। इससे पहले जूता-चप्पल की दुकान में मरीज का उपचार होते मिला था। कई जगहों पर छप्पर, गली, मोहल्ले और टूटी बेंच पर इलाज चल रहा है।
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जनपद में स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 33 क्लीनिक और मात्र 26 पैथोलॉजी पंजीकृत है। ये आंकड़ा देखने में बहुत कम है लेकिन शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों इनकी संख्या कई गुना है। सैकड़ों की संख्या में झोलाछाप जगह-जगह क्लीनिक और पैथोलॉजी संचालित कर रहे हैं। हाल ही में डेरापुर सीएचसी अधीक्षक डॉ. पुनीत पांडेय के निरीक्षण में मुंगीसापुर की एक जूते-चप्पल की दुकान में झोलाछाप मरीज को भर्ती कर इलाज करते मिला।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दुकान तो बंद कराई लेकिन संचालक के खिलाफ फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की गई, सिर्फ नोटिस देकर खानापूरी कर ली। वहीं, दो दिन पहले सिकंदरा के हरिहरपुर में स्वास्थ्य विभाग को मकान के अंदर झोलाछाप मरीजों का इलाज करता मिला यहां घर के बरामदे में दवाइयां व ग्लूकोज की बोतलें भी बड़ी संख्या में सजाकर रखी गई थीं। कार्रवाई के नाम पर यहां भी स्वास्थ्य टीम ने बगैर नोटिस दिए क्लीनिक बंद करा खानापूर्ति कर दी।
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इधर, डेरापुर अधीक्षक का कहना है कि उन्होंने जहां छापा मारा उनमें सिठमरा से बीरन सिंह व सुशील कुमार, मुंगीसापुर से उमाकांत, प्रिंस राज, स्वाति हॉस्पिटल, सौरभ पैथोलॉजी, अमन कुमार, शशिकांत सचान, विश्वनाथ व इंद्र प्रकाश, कमलपुर बंबे के पास संचालित अतुल कुमार और डेरापुर श्यामनगर से विमल कुमार (चश्मे वाला) के नाम शामिल हैं। इन सभी संचालकों को नोटिस जारी कर अपनी डिग्री और पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी किसी ने नोटिस का जवाब देना जरूरी नहीं समझा। इसके बाद भी जिम्मेदार भी इन पर कार्रवाई करने की सुध नहीं ले रहे हैं। यहां तक कि विभाग के अफसरों के बीच आपसी तालमेल की भी कमी नजर आ रही है।
डेरापुर सीएचसी के नोडल व डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक कुमार से बात की गई तो उनकी ओर से सीएचसी स्तर से नोटिस दिए जाने की जानकारी न होने की बात कही। उन्होंने बताया कि 10 सितंबर से 30 सितंबर तक चलाए गए झोलाछाप विरोधी अभियान के तहत की गई छापेमारी और कार्रवाइयों की जानकारी सीएचसी अधीक्षक डॉ. पुनीत पांडेय की ओर से नहीं दी गई है। पूरे मामले की विस्तृत जानकारी जुटाने के बाद ही स्थिति स्पष्ट की जा सकेगी। उधर, सीएचसी अधीक्षक डॉ. पुनीत पांडेय का कहना है कि चिह्नित अवैध क्लीनिक संचालकों को नोटिस दिए गए थे। नोटिस का जवाब न मिलने की दशा में नियमानुसार कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है।
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सीन-1
डेरापुर क्षेत्र के कुढ़ावल गांव में एक घर के बाहर पड़े छप्पर में पड़ी दो टूटी बेंचों पर मरीजों का उपचार होते मिला। मरीजों को बचाव के लिए उपचार करने वाले युवक छप्पर को बोतल लटकाकर मरीजों का उपचार करता मिला। वहीं बेंच के नीचे ही प्रयोग की जा चुकीं बोतलें व मेडिकल कचरा पड़ा मिला। इससे यहां मरीजों में संक्रमण फैलने का खतरा भी बना हुआ है।
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सीन-2
भोगनीपुर क्षेत्र के माचा में घरों की गैलरी को अवैध क्लीनिक बना लिया गया है। बृहस्पतिवार को यहां एक घर की गैलरी में महिला को बेंच पर लिटाकर युवक ड्रिप चढ़ाता मिला। बोतल स्टैंड की जगह दीवार पर लगी कील में लटकी मिली।
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पंजीकरण क्लीनिक का, कराते हैं प्रसव
भोगनीपुर, सिकंदरा व डेरापुर बहुत से अस्पताल ऐसे हैं जिन्होंने अपना पंजीकरण क्लीनिक का करवा रखा है। वहां पर ओपीडी के साथ प्रसव भी होता है। इनमें गांव की दाई प्रसव कराती हैं। कई बार असुरक्षित प्रसव होने के कारण जच्चा-बच्चा की मौत के भी कई मामले सामने आ चुके हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से आशा कार्यकर्ता कमीशन के लालच में गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए सीएचसी ले जाने की जगह इन मानक विहीन अस्पतालों में ले जाती हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में 33 क्लीनिक व 26 पैथोलॉजी का पंजीकरण है। जबकि धरातल पर इनकी संख्या दोगुना से अधिक है।
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बयान.....
उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ब्लॉक स्तर पर टीमें गठित कर अभियान चलाया जा रहा है। इसमें बिना पंजीकृत संचालित हो रहे क्लीनिक, पैथोलॉजी को चिह्नित किया जा रहा है। जहां खामियां मिली हैं उन संचालकों को नोटिस दिया गया है। जवाब न मिलने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. एसएल वर्मा, एसीएमओ
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