गर्भाशय के मुख (सर्वाइकल) का कैंसर अब कोशिकाओं के शुरुआती बदलाव के साथ ही पकड़ में आ जाएगा। इससे रोगियों को कारगर इलाज मिल सकेगा। कोशिकाओं के अंदर होने वाला यह बदलाव आप्टिकल डेंसिटी उपकरण की जांच से पता चलेगा।
आईआईटी कानपुर और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज का स्त्री रोग विभाग संयुक्त रूप से यह शोध करेगा। सोमवार को कॉलेज की इथिकल कमेटी की बैठक में शोध प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई।
इसी तरह आईआईटी अस्थि रोग विभाग के साथ मिलकर घुटने की पैडिंग और कार्टिलेज कोशिकाओं पर भी शोध करेगा।
मेडिकल कॉलेज में इथिकल कमेटी की चेयरमैन डॉ. मीरा अग्निहोत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में शोध के संबंध में बताया गया कि आस्टियोपोरोसिस के रोगियों के घुटने की कार्टिलेज और पैडिंग कोशिकाओं को रिजनरेट करने की संभावनाएं आईआईटी तलाश करेगा।
इसके अलावा मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉ. रिचा गिरि के शोध को भी हरी झंडी मिली है। इसमें कुत्ता काटने पर अब एक ही इंजेक्शन लगेगा। जख्म के चारों तरफ इम्युनोग्लोबलिन का इंजेक्शन लगाकर रोग को बढ़ने से रोक दिया जाएगा। इसके साथ ही गैस्ट्रोइंटोलोजिस्ट डॉ. विनय कुमार के हेपेटाइटिस सी के जीनो टाइप तीन और एक के शोध को हरी झंडी मिली है। कुल 15 शोध को अनुमति मिली है।