खुद पीएम मोदी ने गंगा से जुड़ा सतत विकास का मॉडल सामने रखते हुए कहा कि अर्थ-गंगा में गंगा के किनारे आर्थिक गतिविधियों के लिए केंद्रित है। नदी किनारे वॉटर स्पोर्ट्स, कैंप के लिए जगहों के विकास, साइकिलिंग व वॉकिंग ट्रैक आदि का विकास करना होगा।
इसके लिए पूर्व सैनिकों व स्वयं सहायता समूहों को प्राथमिकता दी जा सकती है। किसानों को जीरो बजट कृषि, नदी किनारे फलों के पेड़ व नर्सरियां लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
गंगा में धार्मिक गतिविधियों संग हाइब्रिड पर्यटन
उन्होंने कहा कि गंगा के किनार हाइब्रिड पर्यटन यानी नई तरह से विकसित एडवेंचर पर्यटन की भारी क्षमता रखते हैं। यह और ‘गंगा वन्यजीव संरक्षण व क्रूज पर्यटन’ यहां पारंपरिक तौर पर की जाने वाली धार्मिक गतिविधियों के साथ आगे बढ़ाए जा सकते हैं।
इनसे लोगों को आय होगी। यह गंगा की सफाई के लिए सतत फंड जमा करने में मददगार होगा। उन्हाेंने फिर एक बार जोर देकर कहा कि गंगा की ‘स्वच्छता, अविरलता और निर्मलता’ के लिए लोगों और सभी समुदायों को जागरुक करने और साथ लाने की जरूरत है।
सरकार ने क्लीन गंगा फंड भी बनाया है, जिसमें कॉरपोरेट और एनआरआई से लेकर आम नागरिक भी गंगा कायाकल्प केे लिए आर्थिक मदद कर रहे हैं। खुद पीएम ने 2014 से स्वयं को मिले पुरस्कारों सहित सियोल शांति पुरस्कार के जरिए 16.53 करोड़ रुपये फंड में दिया है।
नमामि गंगे परियोजना
2014 में शुरू की गई। 2015 से 2020 गंगा के कायाकल्प पर 20 हजार करोड़ रुपये खर्च होने हैं। अब तक 7700 करोड़ रुपये लगे। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने पर सबसे ज्यादा काम हुआ।