शिल्पकला और संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी
इस होटल में सुंदर नक्काशी, चित्रकारी, रंगीन खिड़कियां होंगी। पश्चिम बंगाल की कलाकृतियां, चित्र और फर्नीचर का उपयोग किया जाएगा। हरियाली के साथ कई तरह के रंग-बिरंगे फूल वाले पौधों से बगीचा बनाया जाएगा। रेस्तरां में यूपी, उत्तराखंड और राजस्थानी खाने का भी स्वाद पर्यटक ले सकेंगे। राजा-महाराजाओं के समय की शिल्पकला और संस्कृति की झलक भी देखने को मिलेगी। होटल में राजस्थानी, बंगाली और आधुनिक वास्तुकला का संगम देखने को मिलेगा। पेंटिंग के जरिये नाना साहब, रानी लक्ष्मीबाई, ब्रह्मखूंटी, ध्रुव टीला समेत अन्य स्थानों का इतिहास दर्शाया जाएगा।
पीपीपी मॉडल पर बनेगा होटल
होटल का वर्ष 2024 में पास हुआ, लेकिन विशेष डिजाइन को लेकर मानकों के अनुरूप आर्किटेक्ट पर्यटन विभाग को नहीं मिल पाया और कार्य रुक गया। इसके बाद विभाग ने मानकों में बदलाव कर फिर से प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा जो अब मंजूर हो गया है। ये पीपीपी मॉडल पर बनेगा और इसके लिए निवेशक भी खोजे जा चुके हैं। इसके बनने से रोजगार का सृजन होगा।
जानें बारादरी का इतिहास
तीर्थ पुरोहित आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि बारादरी मुगल नाम है। ये ब्रह्मावर्त घाट के पास है, जिसका जीर्णोद्धार 1955 में यूपी सरकार ने दो हजार रुपये का अनुदान देकर कराया था। ये ब्रह्मावर्त के तीर्थयात्रियों के ठहराव के लिए है। यहां पर ब्रह्मखूंटी है। यहां पूरे वर्ष में 40 मेले लगते हैं, जिनमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
टिकैतराय बारादरी को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में विकसित किए जाने एवं उसे अन्य राज्यों की तरह हवेलीनुमा होटल के रूप में विकसित किए जाने का कार्य प्रक्रियाधीन है। मानकों में कुछ बदलाव के बाद ये कैबिनेट के पास भेजा गया था, जो स्वीकृत हो चुका है। -डॉ. अर्जिता ओझा, जिला पर्यटन अधिकारी